28 मई को भारत में वीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती मनाई जाती है। वे एक ऐसे नेता थे जिन्होंने हिंदुत्व विचारधारा को जन्म दिया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, उनकी जीवनगाथा और विचार आज भी राजनीति में विवाद का विषय बनी हुई है। इस लेख में हम सावरकर की ज़िन्दगी, उनके योगदान और उनके इर्द-गिर्द चल रही बहसों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
वीर सावरकर कौन थे?
- पूरा नाम: विनायक दामोदर सावरकर
- जन्म: 28 मई 1883, भागूर, नाशिक (महाराष्ट्र)
- भूमिका: स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, लेखक और हिंदुत्व के प्रवर्तक
- विचारधारा: हिंदुत्व की स्थापना 1922 में की, जो हिंदू राष्ट्रवाद की राजनीति को दिशा देती है
- संघठन: उन्होंने अभिनव भारत नामक संगठन बनाया, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष की वकालत करता था।
सावरकर का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
- उन्होंने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ कड़े कदम उठाए और कई बार जेल में भी रहे।
- 1911 में मोरली-मिंटो सुधारों का विरोध करने पर 50 साल की सजा मिली और उन्हें अंडमान की सेलुलर जेल भेजा गया।
- जेल से 1924 में रिहा होने के बाद भी उन्होंने देशभक्ति के लिए काम किया।
- उन्होंने अस्पृश्यता उन्मूलन का अभियान चलाया और सामाजिक सुधारों पर भी ध्यान दिया।
- उनकी किताब ‘The History of the War of Indian Independence’ में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का विश्लेषण है।
हिंदुत्व और राजनीतिक विचारधारा
- सावरकर ने हिंदुत्व को हिंदू राष्ट्रवाद की आधारशिला माना।
- वे हिंदू एकता और राष्ट्रीयता पर जोर देते थे।
- उन्होंने मुस्लिम लीग और अन्य गैर-कांग्रेसी दलों के साथ गठबंधन कर कई राज्यों में सरकार बनाई।
- हालांकि, वे 1942 के ‘क्विट इंडिया मूवमेंट’ का समर्थन नहीं करते थे।
विवाद और आलोचना
- सावरकर की भूमिका महात्मा गांधी की हत्या के मामले में विवादित रही।
- 1948 में उन्हें गांधी हत्या के षडयंत्र में आरोपी बनाया गया, लेकिन सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया।
- कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई आलोचकों ने सावरकर पर ब्रिटिश सरकार से पेंशन लेने और ब्रिटिश नौकर होने का आरोप लगाया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को इस तरह के बयान देने से मना किया है और चेतावनी भी दी है।
- महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी ने भी सावरकर पर आरोप लगाए, जो विवादों को और गहरा करते हैं।
वीर सावरकर से जुड़ी कुछ खास बातें
- बचपन में ही उन्होंने हिंदुत्व के लिए संघर्ष शुरू कर दिया था।
- 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक मस्जिद को निशाना बनाकर प्रदर्शन किया था।
- उन्होंने गाय के संरक्षण का समर्थन किया, लेकिन गाय पूजा का प्रचार नहीं किया।
- पोर्ट ब्लेयर का हवाई अड्डा 2002 में उनके नाम पर ‘वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा’ के रूप में नामित किया गया।
- 1964 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उन्होंने समाधि लेने का संकल्प लिया और 26 फरवरी 1966 को उनका निधन हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी का सावरकर पर बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मई को वीर सावरकर को ‘माँ भारती के सच्चे पुत्र’ करार देते हुए उनकी देशभक्ति और साहस की तारीफ की। मोदी ने कहा कि सावरकर ने विदेशी शासन की कठोर यातनाओं के बावजूद अपने देश के प्रति अपना प्रेम और समर्पण कभी नहीं छोड़ा।
राजनीतिक विवादों का केंद्र
- सावरकर को भारतीय राजनीति में एक कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी नेता के रूप में देखा जाता है।
- भाजपा उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानती है, जबकि कांग्रेस सहित अन्य दल उनसे असहमति रखते हैं।
- सावरकर की छवि और विचारधारा पर बहस आज भी जारी है और यह भारत के राजनीतिक परिदृश्य में गहरा प्रभाव डालती है।
निष्कर्ष: वीर सावरकर की विरासत
वीर सावरकर की जिंदगी साहस, देशभक्ति और विवादों से भरी रही। उनकी हिंदुत्व विचारधारा ने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी, जबकि उनके कई कार्य और विचार आज भी आलोचना का विषय हैं। चाहे आप उनके समर्थक हों या आलोचक, यह तथ्य है कि सावरकर भारतीय इतिहास के एक प्रभावशाली और जटिल व्यक्तित्व हैं।





