Delimitation : देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बड़ी तैयारी है..ऐसा लगता है इस मुद्दे पर सभी दलों की एक राय है..लेकिन इसके साथ ही परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव नई बहस को जन्म दे रहा है। सवाल कई खड़े हो रहे हैं..मसलन परिसीमन को लेकर उठ रही चिंताओं और सरकार की मंशा के बीच क्या महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का रास्ता अब सच में साफ होने जा रहा है, या फिर यह भी एक बड़ा राजनीतिक दांव है? सवाल ये भी है कि क्या लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देगा, या राज्यों के बीच नए विवाद खड़े करेगा?
दक्षिण भारत की आपत्तियों के बीच क्या केंद्र सभी को साथ लेकर चल पाएगा? संविधान संशोधन के लिए जरूरी विशेष बहुमत जुटाना क्या सरकार के लिए आसान होगा? और क्या विपक्ष इस मुद्दे पर समर्थन देगा या सियासत और तेज होगी? तमाम सवालों को टटोलने की कोशिश की है इस आर्टिकल में..
Delimitation : नारी शक्ति वंदन अधिनियम विशेष, परिसीमन पर फंसा पेंच
देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने मोदी सरकार ने बड़ा प्रस्ताव तैयार किया है। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया जा रहा है. इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसके लागू होने पर संसद में 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।
केंद्र सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में संविधान संशोधन विधेयक ला रही है..लेकिन सूत्रों का दावा है कि परिसीमन आयोग के गठन, लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या में संभावित बदलाव के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी भी चल रही है। हालांकि औपचारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार ने सभी दलों में सहमति बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से सहयोग की अपील की है।

Delimitation : नारी शक्ति वंदन अधिनियम
- 2029 लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने की तैयारी
- महिलाओं को 33% आरक्षण देने की तैयारी
- लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 850 हो जाएंगी
- संसद में 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिशों के बीच पूरे मसले में परिसीमन सबसे बड़ा पेच बनकर उभर रहा है। सरकार भी इस पर स्पष्ट रुख सामने नहीं ला रही है। विपक्ष, खासकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस प्रक्रिया के समय और मंशा पर सवाल उठाया है। महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष ने बुधवार को एक मीटिंग भी की। यह बैठक दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर आयोजित की गई। जिसमें राहुल गांधी भी शामिल हुए। वहीं में शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट) और AAP नेता भी शामिल हुए।

विपक्ष की तैयारियों को देखते हुए लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराना गठबंधन की सरकार के लिए आसान नहीं होगा। इसके लिए सरकार को अपने सहयोगी सभी दलों को साथ रखते हुए विपक्षी दलों को साधना जरूरी होगा। विधेयक पर चर्चा के लिए कुल सदस्यों के 50% का सदन में मौजूद रहना जरूरी है। वहीं मौजूद सदस्यों में से दो तिहाई के समर्थन से ही विधेयक पारित हो सकता है। भाजपा ने लोकसभा-राज्यसभा के अपने सभी सदस्यों के लिए तीन व्हिप जारी कर 16-18 अप्रैल तक सदन में उपस्थिति रहने को कहा है।
Delimitation : लोकसभा का अंकगणित
- लोकसभा में सरकार की स्थिति मजबूत है
- 543 सदस्यों वाली सदन में एनडीए के पास 293 से 294 सीटें हैं
- सामान्य बिल पास कराने के लिए 272 के बहुमत के आंकड़े से ऊपर है
- लेकिन संविधान संशोधन की डगर इतनी आसान नहीं है
- संविधान का आर्टिकल 368 में संशोधन के लिए ‘विशेष बहुमत’ का उल्लेख है
- यानि सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और वोटिंग के समय मौजूद सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन
- अगर सभी सदस्य मौजूद रहे तो सरकार को करीब 362 वोटों की जरूरत पड़ेगी
- ऐसे में NDA बाहर के दलों से लगभग 68 से 70 अतिरिक्त वोट चाहिेए होंगे
Delimitation : राज्यसभा का अंकगणित
- राज्यसभा हमेशा से सत्ता पक्ष के लिए कठिन परीक्षा रही है
- अभी 245 सदस्यीय सदन में NDA की 141 सीटें हैं
- लेकिन दो-तिहाई यानी 164 के आंकड़े से 23 सीटें कम हैं
Delimitation : टाइमिंग पर सवाल, पश्चिम बंगाल-तमिलनाडु में चुनाव
इस फासले को पाटने के लिए सरकार उन क्षेत्रीय दलों पर नजरें जमाए है, जो किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं. इनमें YSRCP, BRS और BJD जैसे दल शामिल हैं. हालांकि ये दल महिला आरक्षण का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन सीटों की संख्या में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर उनकी चिंताएं बनी हुई हैं. परिसीमन पर बीजेपी को सबसे बड़ी चुनौती दक्षिण भारत से मिल रही है…तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा कि दक्षिणी राज्यों को सीटें बढ़ाना मंजूर नहीं। उधर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि इससे संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा और संघीय सिद्धांतों को नुकसान पहुंचेगा।

परिसीमन को लेकर उठ रही चिंताओं और सरकार की मंशा के बीच क्या महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का रास्ता अब सच में साफ होने जा रहा है, या फिर यह भी एक बड़ा राजनीतिक दांव है? या फिर परिसीमन की उलझनों में फंस जाएगा? सवाल ये भी है कि क्या लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव क्या महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देगा, या राज्यों के बीच नए विवाद खड़े करेगा? दक्षिण भारत की आपत्तियों के बीच क्या केंद्र सभी को साथ लेकर चल पाएगा?
Delimitation : क्या बहुमत जुटाना सरकार के लिए होगा आसान ?
संविधान संशोधन के लिए जरूरी विशेष बहुमत जुटाना क्या सरकार के लिए आसान होगा? और क्या विपक्ष इस मुद्दे पर समर्थन देगा या सियासत और तेज होगी? सबसे बड़ा सवाल क्या महिला आरक्षण वाकई महिलाओं को सशक्त करेगा, या यह सिर्फ चुनावी रणनीति बनकर रह जाएगा? अब नजरें संसद के विशेष सत्र पर है…जहां तय होगा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम इतिहास बनाएगा या फिर बहसों में ही उलझकर रह जाएगा।

