सीजफायर पर गरमाई सियासत: विपक्ष की संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग

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Ceasefire Sparks Political Storm: Opposition Demands Answers, Govt Calls it Strategic Move

रणनीतिक कदम का विशेषज्ञों ने किया स्वागत

BY: VIJAY NANDAN

पाकिस्तान के साथ हाल ही में हुए संघर्ष के बीच भारत ने सीजफायर (संघर्षविराम) पर सहमति जताई है। इस फैसले ने देश की आंतरिक राजनीति से लेकर वैश्विक मंच तक व्यापक बहस को जन्म दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई हाईलेवल बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया, जिसे लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों, रक्षा विशेषज्ञों और कूटनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सीजफायर को लेकर जहां एक ओर सरकार इसे रणनीतिक रूप से जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इस पर पारदर्शिता और संसद में चर्चा की मांग कर रहा है।

राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस पार्टी:

  • कपिल सिब्बल और मनीष तिवारी ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है।
  • सुप्रिया श्रीनेत ने संघर्षविराम पर सरकार से स्पष्टता की मांग की और कहा कि संसद में इस पर चर्चा होनी चाहिए।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद):

  • संजय झा ने संघर्षविराम को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए और पारदर्शिता की मांग की।

समाजवादी पार्टी:

  • पार्टी के नेताओं ने संघर्षविराम पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की और कहा कि इस मुद्दे पर संसद में बहस होनी चाहिए।

शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट):

  • संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी से सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की और कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर विपक्ष को विश्वास में लेना चाहिए।

बीजू जनता दल (बीजेडी):

  • प्रसन्ना आचार्य ने कहा कि सरकार को पाकिस्तान के खिलाफ और कड़े कदम उठाने चाहिए।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी):

  • महबूबा मुफ्ती ने संघर्षविराम का स्वागत किया और कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए राहत की बात है।

रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं

पूर्व डीजीपी एस.वी. वैद्य और हेमंत महाजन ने संघर्षविराम पर सरकार की रणनीति का समर्थन किया और कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है।

विदेश नीति विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव ने कहा कि भारत को अपनी संप्रभुता के मुद्दों पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करनी चाहिए।

रक्षा विशेषज्ञ शिवाली देशपांडे और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के पूर्व सदस्य तिलक देवशर ने सरकार की नीति का समर्थन किया और कहा कि यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।

पूर्व भारतीय उच्चायुक्त जी. पार्थसारथी ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में सतर्क रहना चाहिए और किसी भी समझौते में अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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