Israel: इजरायल की राजनीति में सरकार गठन को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अरब नेतृत्व वाली राजनीतिक पार्टियों के गठबंधन ‘जॉइंट लिस्ट’ और ‘राआम’ पार्टी ने विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम से मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर संकट गहराता दिखाई दे रहा है।
‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉइंट लिस्ट ने गुरुवार को आइसेनकोट के समर्थन की घोषणा की। पार्टी ने कहा कि वह सरकार गठन की प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग के सामने औपचारिक रूप से उनके नाम की सिफारिश करेगी। वहीं, अरब नेतृत्व वाली राआम पार्टी के आठ सांसद पहले ही आइसेनकोट को समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं।
Israel: राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग को सौंपी जाएगी सिफारिश
जॉइंट लिस्ट ने स्पष्ट किया है कि वह राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग के साथ होने वाली औपचारिक बातचीत में गादी आइसेनकोट को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश करेगी। पार्टी के मुताबिक, यह फैसला नेतन्याहू और उनकी सरकार की वापसी रोकने की जनता की मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
इजरायल के राष्ट्रपति को सभी राजनीतिक दलों से बातचीत के बाद यह तय करना होता है कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी किस सांसद को सौंपी जाए। राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने कहा है कि वह रविवार को इस संबंध में अपना फैसला सुनाएंगे। इसके बाद चुने गए नेता को गठबंधन बनाने के लिए निर्धारित समय मिलेगा।
Israel: नेतन्याहू की सहयोगी पार्टी ने समर्थन देने से किया इनकार
इस चुनावी घटनाक्रम में नेतन्याहू के पुराने सहयोगी दल यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म (UTJ) का रुख भी काफी अहम हो गया है। सात सीटों वाली इस पार्टी ने किसी भी प्रधानमंत्री पद के दावेदार के पक्ष में सिफारिश नहीं करने का फैसला किया है।
पार्टी के भीतर शामिल डेगेल हातोराह गुट के पास चार सीटें हैं। इस गुट ने अपने धार्मिक नेतृत्व के निर्देशों के बाद किसी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करने का फैसला लिया। इससे नेतन्याहू को मिलने वाले समर्थन में कमी आई है।
ताजा स्थिति के मुताबिक, राष्ट्रपति के सामने नेतन्याहू के पक्ष में 46 सांसदों ने सिफारिश की है, जबकि सात सांसदों वाली UTJ ने किसी का नाम आगे नहीं बढ़ाया। वहीं, आइसेनकोट के समर्थन में 67 सांसदों की सिफारिशें पहुंच चुकी हैं।
Israel: इजरायल की संसद में अरब पार्टियों ने जीती थीं 19 सीटें
27 अक्टूबर को हुए आम चुनाव के बाद इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल की थीं। यह इन दलों का अब तक का सबसे बड़ा चुनावी प्रदर्शन बताया जा रहा है।
इनमें राआम पार्टी के आठ और जॉइंट लिस्ट के 11 सांसद शामिल हैं। दोनों दलों के आइसेनकोट के समर्थन में आने से सरकार गठन की प्रक्रिया में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है।
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है। यहां सरकार बनाने के लिए 120 में से कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। हालांकि, किसी उम्मीदवार को राष्ट्रपति के सामने 67 सांसदों की सिफारिश मिलना और उन सभी का सरकार के विश्वास मत में समर्थन करना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए आइसेनकोट के सामने अभी गठबंधन को लेकर कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
Israel: आइसेनकोट पहले राआम पार्टी को सरकार में शामिल करने से कर चुके थे इनकार
इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि गादी आइसेनकोट पहले अरब नेतृत्व वाली राआम पार्टी को अपनी सरकार में शामिल करने से इनकार कर चुके थे।
26 सितंबर को चैनल 12 को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनकी प्रस्तावित सरकार में राआम के लिए जगह नहीं होगी। उनका कहना था कि उस समय कोई भी अरब या अति-रूढ़िवादी यहूदी पार्टी उनके तय किए गए राजनीतिक सिद्धांतों और शर्तों पर खरी नहीं उतर रही थी।
उन्होंने राआम के प्रमुख मंसूर अब्बास का नाम लेते हुए भी कहा था कि फिलहाल उन्हें ऐसी कोई पार्टी नजर नहीं आती, जो उनकी सरकार में शामिल होने के लिए जरूरी शर्तें पूरी करती हो।
अब चुनाव के बाद वही राआम पार्टी उनके प्रधानमंत्री बनने के समर्थन में खड़ी है। हालांकि, इस समर्थन का अर्थ यह नहीं है कि पार्टी को आइसेनकोट की सरकार में मंत्री पद या गठबंधन में शामिल होने की गारंटी मिल गई है।
Israel: 67 सांसदों का समर्थन मिलने के बावजूद आइसेनकोट के सामने चुनौतियां
गादी आइसेनकोट को भले ही राष्ट्रपति के सामने 67 सांसदों का समर्थन मिल गया हो, लेकिन उनके लिए सरकार बनाना आसान नहीं होगा। विपक्षी गठबंधन के भीतर भी कई मुद्दों पर मतभेद हैं। खासतौर पर अरब पार्टियों की भूमिका, सैन्य सेवा से जुड़े नियम और सरकार की नीतियों को लेकर अलग-अलग दलों के विचार एक जैसे नहीं हैं।
इसके अलावा, आइसेनकोट के सहयोगी अविग्दोर लिबरमैन पहले ही अरब पार्टियों को शामिल करने वाली सरकार का समर्थन नहीं करने की बात कह चुके हैं। ऐसे में आइसेनकोट को यह तय करना होगा कि वे अरब दलों को सरकार में शामिल करेंगे या बाहर से समर्थन लेकर आगे बढ़ेंगे।
फिलहाल राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग के फैसले का इंतजार है। रविवार को वह तय करेंगे कि सरकार बनाने का पहला अवसर किसे दिया जाए। यदि आइसेनकोट को यह जिम्मेदारी मिलती है, तो उनके सामने अलग-अलग राजनीतिक दलों को एक साथ लाकर बहुमत साबित करने की चुनौती होगी।


