Rajnath Singh: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के सेबू में आयोजित 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और सुरक्षा संबंधी अनुभवों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान से जुड़े राज्य प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्पष्ट प्रतिक्रिया थी। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत आसियान देशों के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों में हासिल अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।
राजनाथ सिंह के मुताबिक, भारत ने लंबे समय तक सीमा पार से आने वाली सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया है। इस दौरान देश ने आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी रणनीतियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि भारत का अनुभव केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में काम करते हुए विकसित हुआ है। भारत इस अनुभव का उपयोग दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ाने में भी कर सकता है।
Rajnath Singh: आतंकवाद के खिलाफ भारत का अनुभव जमीन पर परखा गया
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद विरोधी अभियानों में भारत के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने दशकों तक विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया है। इस दौरान आतंकवादी गतिविधियों से निपटने, सुरक्षा खतरों का आकलन करने और जवाबी रणनीतियां तैयार करने के क्षेत्र में अनुभव हासिल हुआ है।
Addressing the ADMM-Plus meeting in Cebu (Philippines). https://t.co/ekudPUdLjs— Rajnath Singh (@rajnathsingh) October 29, 2026
उन्होंने कहा कि भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीतियां वास्तविक परिस्थितियों में परखी गई हैं। राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद एक ऐसी चुनौती है, जिसका सामना करने के लिए देशों के बीच जानकारी, तकनीक और व्यावहारिक अनुभव का आदान-प्रदान जरूरी है।
भारत की ओर से आसियान देशों को अनुभव साझा करने की पेशकश को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के विस्तार के रूप में देखा जा सकता है। इससे आतंकवाद से निपटने के तरीकों, सुरक्षा तैयारियों और संबंधित संस्थाओं के बीच तालमेल पर सहयोग के अवसर बढ़ सकते हैं।
Rajnath Singh: ऑपरेशन सिंदूर को बताया आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और जवाबी कार्रवाई का उदाहरण बताया। रक्षा मंत्री के अनुसार, इस अभियान के दौरान आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया और भारत ने सीमा पार से जुड़े आतंकवाद के प्रति अपना रुख स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया कि आतंकवादी गतिविधियों को लेकर देश का रुख स्पष्ट है। भारत अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने को प्रतिबद्ध है और आतंकवाद से उत्पन्न खतरों को नजरअंदाज नहीं करेगा।
राजनाथ सिंह ने इस अभियान को पाकिस्तान से जुड़े राज्य प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया। यह भारत के सुरक्षा दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
भारत और ASEAN के बीच रणनीतिक सहयोग पर जोर
रक्षा मंत्री ने आसियान को भारत की विदेश और सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण स्थान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र को खुला, समावेशी और नियमों पर आधारित व्यवस्था के अनुरूप देखना चाहता है। इस लक्ष्य को हासिल करने में आसियान देशों के साथ सहयोग अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत और आसियान के संबंध लंबे समय से व्यापार, कूटनीति, संपर्क व्यवस्था और सुरक्षा सहयोग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत और सहयोग को व्यापक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने भारत की आसियान नीति को साझा हितों, आपसी सम्मान और व्यावहारिक सहयोग पर आधारित बताया। उनके अनुसार, भारत क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान मिलकर निकालने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए आसियान के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाना चाहता है।
Rajnath Singh: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था की वकालत
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा क्षेत्र चाहता है, जहां सभी देशों के हितों का सम्मान हो और अंतरराष्ट्रीय नियमों के आधार पर सहयोग को बढ़ावा मिले।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन और देशों के बीच सहयोग आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से भी अहम हैं।
भारत आसियान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करके क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना चाहता है। रक्षा मंत्रियों की बैठक इस दिशा में विचारों के आदान-प्रदान और साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण मंच है।
Rajnath Singh: समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन पर जोर
रक्षा मंत्री ने समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए नियमों और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का सम्मान जरूरी है।
भारत के लिए समुद्री सुरक्षा का महत्व व्यापारिक मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय संपर्क से भी जुड़ा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों के विस्तार के साथ देशों के बीच निगरानी, सूचना साझा करने और सुरक्षा संबंधी सहयोग की जरूरत भी बढ़ी है।
भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन और समुद्री क्षेत्र में जिम्मेदार व्यवहार को महत्वपूर्ण मानता है। आसियान देशों के साथ सहयोग के जरिए समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर साझा प्रयासों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
Rajnath Singh: आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की पहल
राजनाथ सिंह के संबोधन का एक प्रमुख संदेश यह रहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग, सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और व्यावहारिक अनुभवों का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण है।
भारत ने आतंकवाद से निपटने के अपने अनुभव को आसियान देशों के साथ साझा करने की इच्छा जताकर रक्षा सहयोग को एक नया आयाम देने का संकेत दिया है। इस तरह के सहयोग में प्रशिक्षण, सुरक्षा प्रक्रियाओं की जानकारी और आतंकवादी खतरों से निपटने के तरीकों पर चर्चा शामिल हो सकती है।
फिलीपींस के सेबू में आयोजित ADMM-Plus बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने भारत की आतंकवाद विरोधी नीति, ऑपरेशन सिंदूर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर अपना पक्ष रखा। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि भारत राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्रीय देशों के साथ व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।


