BY: Yoganand Shrivastva
Shikhar Agrawal IAS APO राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को अगले आदेश तक ‘अवेइटिंग पोस्टिंग ऑर्डर्स’ (APO) की स्थिति में रख दिया है। उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर तैनात रहे अग्रवाल के परिवार के साथ मिलकर एक ही रियल एस्टेट कंपनी से करीब 40 विला और कॉटेज खरीदने के मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राज्य के कार्मिक विभाग ने बुधवार देर रात आदेश जारी कर उन्हें प्रशासनिक कारणों से APO में रखने की जानकारी दी।
संपत्ति खरीद को लेकर उठे सवाल
Shikhar Agrawal IAS APO मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों ने ढाई साल के भीतर एक ही रियल एस्टेट कंपनी से लगभग 40 विला और कॉटेज खरीदे। इस खरीद में उनकी पत्नी और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और ससुराल पक्ष के सदस्यों के शामिल होने का दावा किया गया है।
अग्रवाल मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर भी रह चुके हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से उनके जुड़ाव के कारण यह मामला चर्चा में आया। हालांकि, संपत्ति खरीद से जुड़े आरोपों और उनके संबंध में किसी भी निष्कर्ष को आधिकारिक जांच के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकेगा।
प्रशासनिक कारणों से APO में रखने का आदेश
Shikhar Agrawal IAS APO राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश पर संयुक्त सचिव धीरज कुमार सिंह के हस्ताक्षर हैं। आदेश के अनुसार, 1993 बैच के आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को प्रशासनिक कारणों से अगले आदेश तक APO की स्थिति में रखा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई के बाद अग्रवाल को उनके महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है। उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर के संबंध में फिलहाल कोई आदेश जारी होने की जानकारी नहीं दी गई है। बताया गया है कि शिखर अग्रवाल उस समय अपने बच्चों के पास अमेरिका में थे।
कई महत्वपूर्ण विभागों की संभाल चुके हैं जिम्मेदारी
Shikhar Agrawal IAS APO APO में भेजे जाने से पहले शिखर अग्रवाल राजस्थान सरकार में कई अहम पदों पर कार्यरत थे। इनमें उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), राज्य उपक्रम और दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC) विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी शामिल थी।
इसके अलावा वह भिवाड़ी इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट अथॉरिटी में विशेष कार्याधिकारी (OSD) के पद पर भी रहे। उनके पास निवेश, अनिवासी राजस्थानी मामले और ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी थीं। वह RIICO के चेयरमैन और RAJSICO के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के पदों पर भी काम कर चुके हैं।
संपत्ति खरीद को लेकर सामने आए आरोपों के बीच राज्य सरकार की इस कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। मामले में आधिकारिक जांच या आगे की कार्रवाई से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।


