Aaj ka Panchang: 28 अगस्त 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। आज श्रावण मास की पूर्णिमा है और इसी दिन रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जा रहा है। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास से जुड़े इस त्योहार के साथ आज कई अन्य धार्मिक अवसर भी बताए गए हैं। वरलक्ष्मी व्रत, गायत्री जयंती, नारली पूर्णिमा और संस्कृत दिवस जैसे पर्व भी आज के दिन को विशेष बनाते हैं।
पंचांग के अनुसार आज शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सुबह 9:49 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। चंद्रमा कुंभ राशि में रहेंगे, जबकि सूर्य सिंह राशि में स्थित हैं। आज शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। ऐसे में पूजा-पाठ, व्रत, दान और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए दिन की तिथि, नक्षत्र और शुभ-अशुभ समय की जानकारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
28 अगस्त 2026 का पंचांग
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तिथि | शुक्ल पक्ष पूर्णिमा सुबह 9:49 बजे तक, इसके बाद प्रतिपदा |
| वार | शुक्रवार |
| पूर्णिमांत मास | श्रावण |
| अमांत मास | श्रावण |
| विक्रम संवत | 2083, सिद्धार्थ |
| शक संवत | 1948, प्रभाउ |
| ऋतु | वर्षा |
| अयन | दक्षिणायन |
| सूर्योदय | सुबह 5:38 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 6:22 बजे |
| चंद्रोदय | शाम 6:29 बजे |
| चंद्रास्त | सुबह 5:32 बजे |
| नक्षत्र | शतभिषा, रात 3:14 बजे तक |
| योग | अतिगंड, सुबह 7:28 बजे तक |
| करण | बव, सुबह 9:46 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:35 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक |
| राहुकाल | सुबह 10:24 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक |
| गुलिक काल | सुबह 7:13 बजे से 8:49 बजे तक |
| यमघण्टकाल | दोपहर 3:11 बजे से शाम 4:47 बजे तक |
| दिशाशूल | पश्चिम |
| सूर्य राशि | सिंह |
| चंद्र राशि | कुंभ |
| चंद्र निवास | पश्चिम |
श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन का विशेष संयोग
28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा होने के कारण इसका धार्मिक महत्व काफी बढ़ जाता है। इसी दिन भाई-बहन के रिश्ते का प्रमुख पर्व रक्षाबंधन भी मनाया जा रहा है। इस अवसर पर बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं, जबकि भाई बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेते हैं।
श्रावण पूर्णिमा के दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा भी रही है। रक्षाबंधन के कारण आज पूरे दिन घरों में उत्सव और पारिवारिक मिलन का माहौल देखने को मिलेगा।
आज कौन-कौन से पर्व हैं खास
आज रक्षाबंधन के अलावा कई धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर भी बताए गए हैं। इनमें श्रावण पूर्णिमा, वरलक्ष्मी व्रत, गायत्री जयंती, नारली पूर्णिमा और संस्कृत दिवस प्रमुख हैं।
इन पर्वों की अपनी अलग धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। कहीं देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है तो कहीं समुद्र और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं का पालन किया जाता है। गायत्री जयंती के अवसर पर मंत्र जाप और आध्यात्मिक साधना का भी विशेष महत्व माना जाता है।
पूर्णिमा तिथि का समय
पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सुबह 9:49 बजे तक रहेगी। इसके बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी।
पूर्णिमा को धार्मिक रूप से विशेष तिथि माना जाता है। इस दिन पूजा, ध्यान, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने की परंपरा है। रक्षाबंधन का पर्व भी पूर्णिमा तिथि से जुड़ा होने के कारण आज की तिथि विशेष महत्व रखती है।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
आज सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेंगे, जबकि चंद्रमा कुंभ राशि में संचरण करेंगे। पंचांग के अनुसार चंद्रमा का निवास पश्चिम दिशा में माना गया है।
चंद्रमा की राशि स्थिति को दैनिक पंचांग और ज्योतिषीय गणना में महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से जुड़ी स्थिति विशेष रूप से ध्यान देने योग्य होती है।
शतभिषा नक्षत्र और अतिगंड योग
आज शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव रात 3:14 बजे तक बताया गया है। इसके बाद अगले नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। पंचांग में नक्षत्र को दिन की गतिविधियों और धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
वहीं अतिगंड योग सुबह 7:28 बजे तक रहेगा। इसके बाद अन्य योग प्रभावी होंगे। इसके अलावा दिन के पंचांग में कई अन्य योगों का भी उल्लेख मिलता है। करण की बात करें तो बव करण सुबह 9:46 बजे तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त में कर सकते हैं शुभ कार्य
28 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:35 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक रहेगा। पारंपरिक पंचांग गणना में अभिजीत मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
हालांकि किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा या संस्कार के लिए स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार समय में अंतर हो सकता है। इसलिए बड़े धार्मिक आयोजन के लिए स्थानीय समय की भी पुष्टि करना उचित रहेगा।
आज का राहुकाल कब रहेगा
शुक्रवार को 28 अगस्त का राहुकाल सुबह 10:24 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक बताया गया है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा आज गुलिक काल सुबह 7:13 बजे से 8:49 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 3:11 बजे से शाम 4:47 बजे तक रहेगा।
दिशाशूल किस दिशा में है
आज के पंचांग के अनुसार दिशाशूल पश्चिम दिशा में है। धार्मिक मान्यताओं में दिशाशूल को यात्रा के समय ध्यान रखने योग्य कारक माना जाता है। यदि पश्चिम दिशा की यात्रा करनी हो तो परंपरागत रूप से बताए गए उपायों का पालन किया जा सकता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय
28 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5:38 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:22 बजे बताया गया है। चंद्रमा का उदय शाम 6:29 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 5:32 बजे होगा।
पूर्णिमा होने के कारण शाम के समय चंद्र दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी विशेष वातावरण रहेगा।
दक्षिणायन और वर्षा ऋतु का प्रभाव
वर्तमान समय में दक्षिणायन चल रहा है और ऋतु वर्षा है। पंचांग में अयन और ऋतु का उल्लेख सूर्य की गति तथा मौसम चक्र से जुड़ी पारंपरिक कालगणना के रूप में किया जाता है।
श्रावण मास भी वर्षा ऋतु से जुड़ा हुआ है और इस दौरान धार्मिक आयोजनों, व्रत तथा पूजा-पाठ की विशेष परंपरा देखने को मिलती है।
चंद्र ग्रहण को लेकर क्या है पंचांग में उल्लेख
28 अगस्त के पंचांग विवरण में चंद्र ग्रहण का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि ग्रहण से जुड़े सूतक, स्पर्श और मोक्ष जैसे समय किसी स्थान विशेष के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए ग्रहण से संबंधित धार्मिक नियमों का पालन करने से पहले स्थानीय पंचांग या प्रमाणित खगोलीय जानकारी से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
रक्षाबंधन पर पूजा और धार्मिक कार्यों की तैयारी
रक्षाबंधन के दिन बहनें भाई को राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार करती हैं। इसमें रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी जैसी सामग्री रखी जाती है। भाई को तिलक लगाकर राखी बांधी जाती है और उसकी सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
श्रावण पूर्णिमा होने के कारण आज दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का भी विशेष महत्व माना जाता है। परिवार के साथ पूजा और त्योहार मनाने से इस पर्व की खुशियां और बढ़ जाती हैं।
28 अगस्त का दिन क्यों है खास
28 अगस्त का दिन एक साथ कई धार्मिक अवसरों के कारण महत्वपूर्ण है। श्रावण पूर्णिमा, रक्षाबंधन और अन्य पर्वों के साथ आज तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त की दृष्टि से भी कई महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं।
दिन की शुरुआत पंचांग देखकर करने से पूजा-पाठ, राखी बांधने और अन्य धार्मिक गतिविधियों का समय तय करने में सुविधा हो सकती है। हालांकि शुभ-अशुभ समय और धार्मिक मान्यताएं परंपरा तथा स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए महत्वपूर्ण अनुष्ठानों के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।




