BJP: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने अपने राजनीतिक सफर को लेकर ऐसा खुलासा किया है, जिसने उनके पुराने फैसले और उससे जुड़े अनुभवों को फिर चर्चा में ला दिया है। 2004 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेने वाले अभिनेता ने हालिया बातचीत में बताया कि राजनीति में जाने के बाद उन्हें वह माहौल महसूस नहीं हुआ, जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें आखिरकार समझ आ गया कि राजनीति की दुनिया उनके लिए नहीं है।
अभिनेता ने यह भी बताया कि उनका बीजेपी में जाना किसी बड़े राजनीतिक पद या महत्वाकांक्षा की वजह से नहीं हुआ था। एक पुराने कॉलेज मित्र की सलाह पर उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली थी। हालांकि, समय के साथ राजनीति को करीब से देखने के बाद उनका नजरिया बदलता गया।
BJP: कॉलेज के दोस्त की सलाह पर राजनीति में आए सुरेश ओबेरॉय
सुरेश ओबेरॉय ने एक पॉडकास्ट बातचीत में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत के बारे में बताया। उनके मुताबिक, हैदराबाद में कॉलेज के दिनों के एक दोस्त ने उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लिए कहा था। दोस्त के कहने पर वह पार्टी से जुड़े और 2004 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने औपचारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता ले ली।
पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने चुनाव प्रचार में भी हिस्सा लिया। इसके अलावा पार्टी से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों और गतिविधियों में भी उनकी भागीदारी रही। उस समय उन्होंने अपने फैसले को देश और समाज के लिए काम करने की इच्छा से जोड़ा था।
BJP: बड़े नेताओं से मुलाकात के बावजूद नहीं मिला मन का सुकून
सुरेश ओबेरॉय ने बताया कि बीजेपी में शामिल होने के बाद उनकी मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे वरिष्ठ नेताओं से भी हुई थी। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने उन्हें सम्मान दिया और उनसे उनका संपर्क भी रहा।
हालांकि, अभिनेता के अनुसार उनके एक गुरु ने राजनीति में जाने के फैसले पर उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी। गुरु ने उन्हें सावधान रहने और राजनीतिक लोगों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी थी। सुरेश ओबेरॉय ने कहा कि उनके गुरु ने उन्हें इस तरह पहले कभी नहीं डांटा था, इसलिए वह बात उनके मन में लंबे समय तक रही।
BJP: ‘मुझे अंदर से अच्छी ऊर्जा नहीं मिल रही थी’
राजनीति में कुछ समय बिताने के बाद सुरेश ओबेरॉय को महसूस हुआ कि वह इस माहौल में सहज नहीं हैं। उन्होंने कहा कि फिल्मों और राजनीति के काम करने के तरीके में काफी अंतर है।
अभिनेता के मुताबिक, फिल्म में एक प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद कलाकार अगले काम की ओर बढ़ जाता है, जबकि राजनीति में लोगों और परिस्थितियों के साथ लगातार जुड़े रहना पड़ता है। उन्होंने माना कि वह राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बनकर खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहे थे।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भीतर से खुशी नहीं मिल रही थी और उन्हें वहां वैसी सकारात्मक ऊर्जा महसूस नहीं हुई, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
BJP: राजनीति को लेकर क्यों हुई निराशा?
सुरेश ओबेरॉय ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वह राजनीति को देश के लिए काम करने का माध्यम समझकर उसमें आए थे। लेकिन बाद में उन्हें राजनीतिक गतिविधियों और नेताओं के व्यवहार को लेकर निराशा महसूस हुई।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें लगा कि कई लोग राजनीति के जरिए आर्थिक फायदा उठाने में लगे हुए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान सभी नेताओं को लेकर नहीं है और उन्होंने कुछ नेताओं को इससे अलग बताया।
अभिनेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके आसपास के कुछ वरिष्ठ नेताओं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेते हुए कहा कि वह इन नेताओं के बारे में अपनी आलोचनात्मक टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।
BJP: मोहन भागवत को लेकर कही अलग बात
सुरेश ओबेरॉय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के प्रति अपने सम्मान का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से भागवत के प्रशंसक रहे हैं।
अभिनेता ने एक पुरानी मुलाकात का किस्सा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मोहन भागवत को अपने घर आमंत्रित किया था। काफी समय बाद मुलाकात का अवसर मिला और इस दौरान उनकी पत्नी ने उनके लिए हलवा बनाया था। सुरेश ओबेरॉय के मुताबिक, यह मुलाकात उनके लिए यादगार रही।
BJP: बेटे की फिल्म की रील भी लेकर गए थे नागपुर
सुरेश ओबेरॉय ने बताया कि कुछ दिन पहले ही उनकी मोहन भागवत से फोन पर बातचीत हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने बेटे विवेक ओबेरॉय की फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ की रील नागपुर लेकर गए थे, ताकि उसे मोहन भागवत को दिखा सकें।
इससे यह भी साफ होता है कि राजनीति से दूरी बनाने की बात कहने के बावजूद सुरेश ओबेरॉय के कई सामाजिक और वैचारिक संपर्क अब भी बने हुए हैं।
BJP: 2004 में बीजेपी में शामिल होने के बाद किया था चुनाव प्रचार
सुरेश ओबेरॉय ने फरवरी 2004 में बीजेपी की सदस्यता ली थी। उस समय कई चर्चित फिल्म और टीवी कलाकारों ने भी पार्टी का दामन थामा था। इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के लिए प्रचार किया।
दिलचस्प बात यह है कि उस समय सुरेश ओबेरॉय ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि बीजेपी में शामिल होने का फैसला उन्होंने अपनी इच्छा से लिया था। उन्होंने बताया था कि वह खुद दिल्ली गए थे और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई थी।
BJP: अब राजनीति को लेकर बदल चुका है अभिनेता का नजरिया
सुरेश ओबेरॉय के हालिया बयान से साफ है कि वर्षों पहले राजनीति में कदम रखने को लेकर उनका नजरिया अब काफी बदल चुका है। उन्होंने माना कि राजनीति उनके व्यक्तित्व और काम करने के तरीके के अनुकूल नहीं रही।
फिल्मी दुनिया में लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले अभिनेता अब अपने उस पुराने राजनीतिक अनुभव को पीछे मुड़कर देखते हुए इसे जीवन का एक ऐसा अध्याय मानते हैं, जिसने उन्हें राजनीति की वास्तविकताओं को करीब से समझने का मौका दिया। उनके बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर 2004 में बीजेपी से जुड़ने वाले सुरेश ओबेरॉय ने कुछ समय बाद राजनीतिक सक्रियता से दूरी क्यों बना ली।
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