UNSC: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में व्यापक सुधारों की मांग एक बार फिर मजबूती से उठाई है। संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के कामकाज के तरीकों पर हुई वार्षिक खुली बहस के दौरान भारत ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा परिषद में सुधार अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। भारत ने स्पष्ट किया कि 1945 में तैयार किया गया ढांचा आज की दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की चार्ज डी अफेयर योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद को वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। भारत ने विशेष रूप से सुरक्षा परिषद की सदस्यता बढ़ाने और ग्लोबल साउथ को अधिक प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
UNSC: 1945 के बाद दुनिया में बड़ा बदलाव आया
भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना उस समय की परिस्थितियों के आधार पर तैयार की गई थी, जब दुनिया आज की तुलना में पूरी तरह अलग थी। तब से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में व्यापक बदलाव हुए हैं और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संख्या भी कई गुना बढ़ चुकी है।
योजना पटेल ने तर्क दिया कि करीब आठ दशक पहले बनी व्यवस्था को अनिश्चितकाल तक उसी रूप में जारी नहीं रखा जा सकता। उनके मुताबिक वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और देशों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए सुरक्षा परिषद की संरचना और कार्यप्रणाली में बदलाव आवश्यक है।
भारत की ओर से यह भी कहा गया कि सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता और उसके फैसलों की प्रभावशीलता को लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सवाल उठ रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में परिषद की भूमिका अपेक्षित परिणाम देने में सफल नहीं रही है। ऐसे में संस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यापक सुधार की जरूरत है।
UNSC: सुरक्षा परिषद की सदस्यता बढ़ाने पर भारत का जोर
भारत ने UNSC की स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यता के विस्तार की अपनी पुरानी मांग दोहराई। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि सुरक्षा परिषद में दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों और विशेष रूप से ग्लोबल साउथ की बेहतर भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
भारत का मानना है कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अन्य विकासशील क्षेत्रों की भूमिका काफी बढ़ चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे में इन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व उनकी वैश्विक भूमिका के अनुरूप नहीं है।
भारत ने इस दिशा में बातचीत को केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित रखने के बजाय स्पष्ट लक्ष्य और समय-सीमा के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।
UNSC: सुधार के सभी मुद्दों पर एक साथ चर्चा की जरूरत
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली में बदलाव को व्यापक सुधार प्रक्रिया से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। सदस्यता का विस्तार, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, स्थायी और अस्थायी सदस्यों की भूमिका तथा वीटो जैसे मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
योजना पटेल ने कहा कि UNSC में सुधार करते समय इन सभी पहलुओं को समग्र रूप से ध्यान में रखना होगा। भारत के मुताबिक केवल कामकाज की प्रक्रिया में मामूली बदलाव से परिषद की मौजूदा चुनौतियों का समाधान नहीं होगा, बल्कि संस्थागत स्तर पर व्यापक सुधार जरूरी हैं।
UNSC: अस्थायी सदस्यों के अधिकार बढ़ाने की मांग
भारत ने दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले अस्थायी सदस्यों की भूमिका को भी मजबूत करने की मांग की। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि परिषद के अस्थायी सदस्यों को जरूरी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं तक पर्याप्त पहुंच मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा सकें।
भारत ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंच को कुछ चुनिंदा देशों या सदस्यों तक सीमित रखने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। भारत का कहना है कि सुरक्षा परिषद के कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाई जानी चाहिए।
UNSC: सुरक्षा परिषद को राजनीतिक हितों का मंच नहीं बनाने की अपील
भारत ने सुरक्षा परिषद की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। योजना पटेल ने ‘लिस्टिंग’ और ‘डी-लिस्टिंग’ जैसी प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि परिषद का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए।
भारत के मुताबिक सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता तभी मजबूत होगी, जब उसके फैसले स्पष्ट प्रक्रिया, पारदर्शिता और व्यापक अंतरराष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जाएं। परिषद को सभी सदस्य देशों के लिए भरोसेमंद और प्रभावी संस्था के रूप में काम करना चाहिए।
UNSC: ग्लोबल साउथ को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की वकालत करता रहा है। भारत का तर्क है कि दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं, इसलिए वैश्विक संस्थाओं में भी इस बदलाव का प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।
सुरक्षा परिषद में अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए भारत ने अधिक संतुलित प्रतिनिधित्व की जरूरत बताई है। भारत का कहना है कि सुधार से परिषद की वैधता और उसके फैसलों की स्वीकार्यता दोनों मजबूत हो सकती हैं।
UNSC: भारत ने समयबद्ध बातचीत पर दिया जोर
भारत ने UNSC सुधारों को लेकर चल रही प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए टेक्स्ट-आधारित बातचीत और स्पष्ट समय-सीमा तय करने की आवश्यकता बताई। भारतीय पक्ष के अनुसार लंबे समय तक केवल चर्चा करते रहने के बजाय सुधारों को ठोस दिशा देना जरूरी है।
भारत का रुख है कि सुरक्षा परिषद को ऐसी संस्था के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जो मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकटों के साथ-साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से भी प्रभावी तरीके से निपट सके।
UNSC: भारत के लिए UNSC सुधार क्यों महत्वपूर्ण है
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी करता रहा है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग में भारत की भूमिका लगातार बढ़ी है।
ऐसे में भारत का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उसकी और अन्य विकासशील देशों की भूमिका मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। भारत के ताजा बयान से एक बार फिर साफ है कि वह UNSC की संरचना में व्यापक और समयबद्ध सुधार की मांग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से उठाता रहेगा।




