BY
Yoganand Shrivastava
Meta Apology सोशल मीडिया कंपनी मेटा एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को फेसबुक से हटाए जाने के बाद मामले ने राजनीतिक और संसदीय स्तर पर तूल पकड़ लिया। वीडियो हटाने की कार्रवाई को लेकर सरकार ने कंपनी से जवाब तलब किया, जिसके बाद मेटा के शीर्ष अधिकारियों और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच अहम बैठकें हुईं।
Meta Apology डीपफेक और आपत्तिजनक कंटेंट पर जताया खेद
मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने प्लेटफॉर्म पर डीपफेक सामग्री, बाल यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) और कंटेंट मॉडरेशन से संबंधित खामियों को लेकर खेद व्यक्त किया है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ मामलों में प्लेटफॉर्म की नीतियों और निगरानी प्रणाली में कमियां रही हैं, जिनके कारण गलत फैसले सामने आए। कंपनी ने ऐसी त्रुटियों को सुधारने और निगरानी तंत्र को मजबूत करने का भरोसा भी दिया है।

Meta Apology संसदीय समिति की सख्ती के बाद आया बयान
मामले की गंभीरता को देखते हुए संसदीय स्थायी समिति ने मेटा से जवाब मांगा था और कंपनी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय सीमा भी दी गई थी। समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री के प्रसार को लेकर चिंता जताई। इसके बाद मेटा की ओर से सफाई दी गई कि पीएम मोदी का वीडियो तकनीकी त्रुटि के कारण हटाया गया था, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया। अब कंपनी पर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।



