Report: Ratan kumar
Jamtara Paddy Cultivation News झारखंड के जामताड़ा जिले के सोनवाद गांव से कृषि विकास और प्रशासनिक समन्वय की एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को क्षेत्र भ्रमण पर निकले जिले के कृषि अधिकारियों ने न केवल किसानों की समस्याओं को सुना, बल्कि खुद कीचड़ भरे खेतों में उतरकर परंपरागत और वैज्ञानिक तरीके से धान की रोपाई भी की। अधिकारियों को अपने बीच खेत में काम करते देख स्थानीय अन्नदाताओं का उत्साह दोगुना हो गया। इस दौरान ग्रामीणों को उन्नत और वैज्ञानिक खेती की बारीकियों से भी रूबरू कराया गया।
Jamtara Paddy Cultivation News जिला कृषि पदाधिकारी और बीटीएम ने खेत में उतरकर बढ़ाया हौसला
Jamtara Paddy Cultivation News प्राप्त जानकारी के अनुसार, जामताड़ा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम सोनवाद में इस विशेष धान रोपनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार और ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर (BTM) इकबाल हुसैन ने अपनी प्रशासनिक व्यस्तताओं को किनारे रखकर किसानों का मनोबल बढ़ाने के लिए खुद खेतों में कदम रखा। अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर कतारबद्ध तरीके से धान के पौधों की रोपाई की और यह संदेश दिया कि आधुनिक कृषि को अपनाकर ही किसान अपनी तकदीर बदल सकते हैं।
Jamtara Paddy Cultivation News बिचड़ों के वैज्ञानिक उपचार और रोपाई की आधुनिक तकनीक की दी जानकारी
खेतों में काम करने के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए एक व्यावहारिक कार्यशाला का भी संचालन किया। अधिकारियों ने किसानों को धान की नर्सरी (बिचड़े) को सुरक्षित तरीके से उखाड़ने की सही तकनीक समझाई। उन्होंने बताया कि रोपाई से पहले पौधों की जड़ों का वैज्ञानिक तरीकों और दवाओं से उपचार करना क्यों जरूरी है, ताकि फसल को शुरुआती दौर में ही कीटों और बीमारियों से बचाया जा सके। इस दौरान रोपाई के समय पौधों के बीच रखी जाने वाली मानक दूरी के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
Jamtara Paddy Cultivation News ‘वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से बढ़ेगी फसल की गुणवत्ता और पैदावार’— अधिकारियों की अपील
किसानों को संबोधित करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने कहा कि आज के दौर में पारंपरिक ढर्रे से हटकर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना समय की मांग है। वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन करने से न केवल फसल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है, बल्कि कम लागत में उत्पादन (पैदावार) भी कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने क्षेत्र के सभी किसानों से कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं और तकनीकी सलाह का निरंतर लाभ उठाने की भावुक अपील की।





