Hul Diwas Jharkhand 2026 हूल दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन और विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने मोरहाबादी (रांची) स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया। उन्होंने हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
Hul Diwas Jharkhand 2026 “परिणाम की चिंता किए बिना वीरों ने फूंका था बिगुल”
Hul Diwas Jharkhand 2026इस ऐतिहासिक मौके पर वहां उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज का दिन देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। यह वह ऐतिहासिक दिन है, जब हर तरफ फैले अत्याचार और शोषण के खिलाफ आदिवासियों ने अपनी बुलंद आवाज उठाई थी।
सीएम ने कहा:
- शोषकों के खिलाफ मोर्चा: उस दौर में जब चारों तरफ निराशा थी और शोषण से मुक्ति का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था, तब हमारे आदिवासी समाज के पराक्रमी वीरों ने आगे बढ़कर मोर्चा संभाला।
- महानायकों का बलिदान: अंजाम की फिक्र किए बिना हूल क्रांति के अमर नायक सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो ने ब्रिटिश हुकूमत और शोषकों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था।
Hul Diwas Jharkhand 2026 आज भी प्रासंगिक है संघर्ष का संदेश
मुख्यमंत्री ने वर्तमान परिस्थितियों को जोड़ते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि क्रांति और संघर्ष की शुरुआत हमेशा दबे-कुचले और कमजोर वर्गों के शोषण के खिलाफ प्रतिरोध से ही होती है। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि इन वीर सपूतों का त्याग देश और समाज के लिए युगों-युगों तक प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
क्रांति की आग कभी बुझती नहीं है जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भावुक शब्दों में कहा, “क्रांति की आग कभी बुझती नहीं है और न ही इसे बुझाया जा सकता है। इसकी चिंगारी हमेशा अमर रहती है। जैसे दिल्ली के राजघाट और इंडिया गेट पर शहीदों की याद में निरंतर दीप जलता रहता है, वैसे ही हमारे महापुरुषों के विचार और स्मारक हमेशा देश को नई दिशा दिखाते रहेंगे। इन महान सपूतों के बलिदान की बदौलत ही आज झारखंड को वीरों की पावन भूमि कहा जाता है।”





