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Yoganand Shrivastava
Mayawati Statement Ram Mandir Theft अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी, गबन और हेराफेरी के सनसनीखेज मामले को लेकर देश भर में जारी सियासी घमासान के बीच अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। मायावती ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीर और चिंताजनक बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों द्वारा की जा रही राजनीति को भी आड़े हाथों लिया है।
Mayawati Statement Ram Mandir Theft ‘विख्यात मंदिरों की व्यवस्था का अयोध्या में हो अनुसरण’
Mayawati Statement Ram Mandir Theft बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के जरिए इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि मीडिया में लगातार आ रही इस गबन की खबरें विचलित करने वाली हैं। उन्होंने सलाह दी:

- सख्त सजा की मांग: भगवान के चढ़ावे की चोरी और हेराफेरी करने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
- राजनीतिकरण पर रोक: इस पूरे संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण करना पूरी तरह गलत है, दलों को इससे बचना चाहिए।
- पारदर्शी व्यवस्था लागू हो: भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए अयोध्या में भी देश के अन्य विख्यात व बड़े प्रसिद्ध मंदिरों की तर्ज पर चढ़ावे और हिसाब-किताब की आधुनिक व पारदर्शी व्यवस्था का अनुसरण किया जाना चाहिए।
- धर्म और राजनीति का घालमेल बंद हो: राजनीति का अपराधीकरण, अपराध का राजनीतिकरण, धर्म का राजनीतिकरण और राजनीति का अंध धर्मीकरण रोका जाना चाहिए। यह देश, जनहित और संविधान के लिए सबसे उचित होगा।
Mayawati Statement Ram Mandir Theft चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे, SOP के उल्लंघन पर उठे गंभीर सवाल
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी और भारी मात्रा में कैश बरामद होने के बाद जांच की आंच ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों तक पहुंच चुकी है। इसी कड़ी में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने पदों से त्यागपत्र दे चुके हैं।
जांच में सामने आए मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
| जांच के मुख्य बिंदु | विवरण और वर्तमान स्थिति |
| SOP का उल्लंघन (CCTV फुटेज) | नियमों (SOP) के तहत मंदिर के सीसीटीवी फुटेज को 180 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य था, लेकिन इसे महज 45 दिनों में ही डिलीट किया जा रहा था। इससे अहम सबूत नष्ट होने की आशंका है। |
| प्रबंधन पर एकाधिकार | पुलिस पड़ताल के अनुसार, चंपत राय की अनुमति के बिना मंदिर में कोई निर्णय नहीं होता था। उन्होंने प्रबंधन की कमान टिन्नू यादव को सौंप रखी थी। इतने कड़े नियंत्रण के बाद भी लंबे समय तक चोरी होना बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है। |
| डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका | पेशे से होम्योपैथिक डॉक्टर और चंपत राय के करीबी डॉ. अनिल मिश्रा पर एसआईटी (SIT) जांच में सहयोग न करने के आरोप लग रहे हैं। फिलहाल उनके रोल और संपत्तियों की गहन जांच जारी है। |
एसआईटी (SIT) का रुख: हालांकि विशेष जांच दल (SIT) को शुरुआती जांच में चंपत राय के खिलाफ सीधे तौर पर कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अभी तक इस मामले में किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी गई है और हर पहलू को गहराई से खंगाला जा रहा है।





