Parents Maintenance : कानून आर्थिक मदद दिला सकता है, रिश्ते नहीं, हाईकोर्ट
Parents Maintenance : भारतीय परिवार व्यवस्था में अक्सर यह माना जाता है कि बेटा अपने माता-पिता का बुढ़ापे का सहारा बनेगा। लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि माता-पिता आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, तो वे केवल भावनात्मक दूरी या पारिवारिक विवाद के आधार पर बेटे से मासिक गुजारा भत्ता नहीं मांग सकते। अदालत ने कहा कि Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 का उद्देश्य केवल जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक सहायता दिलाना है।

Parents Maintenance : क्या था पूरा मामला?
यह मामला पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले का है। वर्ष 2019 में एक वृद्ध दंपति ने अपने इकलौते बेटे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि बेटा पिछले 13 वर्षों से उनसे मिलने नहीं आता और न ही किसी प्रकार का संपर्क रखता है। शिकायत के बाद पहले एसडीओ ने बेटे को माता-पिता के इलाज और उनसे संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए। बाद में जिला मजिस्ट्रेट ने बेटे को हर महीने 10 हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश भी जारी कर दिया।
Parents Maintenance : बेटे ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
जिला प्रशासन के आदेश के खिलाफ बेटे ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। उसने अदालत को बताया कि वह पहले से ही अपने माता-पिता का स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भर रहा है और उनके इलाज की जिम्मेदारी निभा रहा है।
Parents Maintenance : सुनवाई में कोर्ट ने क्या पाया?
न्यायमूर्ति कृष्णा राव की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों माता-पिता नियमित पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। उनके पास दो मंजिला मकान, कार और पर्याप्त सावधि जमा (एफडी) भी मौजूद हैं। यानी वे आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम हैं। अदालत ने यह भी माना कि बेटे द्वारा स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से चिकित्सा खर्च वहन किया जा रहा है।
Parents Maintenance : कोर्ट ने क्यों रद्द किया गुजारा भत्ता?
हाईकोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम का उद्देश्य उन माता-पिता की सहायता करना है जो स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं। चूंकि इस मामले में माता-पिता आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, इसलिए बेटे को हर महीने 10 हजार रुपये देने के आदेश का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। इसी आधार पर अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द कर दिया।
Parents Maintenance : भावनात्मक रिश्तों पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि माता-पिता की सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि उनका बेटा उनसे फोन पर बात नहीं करता, मिलने नहीं आता और उनका हालचाल नहीं पूछता। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अदालत किसी व्यक्ति को अपने माता-पिता से नियमित मिलने, फोन करने या पारिवारिक संबंध बनाए रखने का आदेश नहीं दे सकती। कानून आर्थिक सहायता सुनिश्चित कर सकता है, लेकिन प्रेम, स्नेह और पारिवारिक जुड़ाव को मजबूर नहीं कर सकता।
Parents Maintenance : फैसले का क्या होगा असर?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जहां आर्थिक रूप से सक्षम माता-पिता केवल पारिवारिक मतभेद या भावनात्मक उपेक्षा के आधार पर भरण-पोषण की मांग करते हैं। इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि भरण-पोषण का अधिकार आर्थिक जरूरत पर आधारित है, न कि केवल रिश्तों में आई दूरी पर।
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