Report: Neha gupta
MP Sudama Prasad Arrah Visit बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड अंतर्गत बिलौटी गांव में पिछले दिनों पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मिलने शनिवार को भाकपा-माले की एक उच्च स्तरीय टीम पहुंची। आरा के सांसद सुदामा प्रसाद के नेतृत्व में पहुंचे नेताओं ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे ‘ठंडे दिमाग से की गई आपराधिक घटना’ करार दिया। सांसद ने नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि बिहार में कानून के राज की जगह ‘बुलडोजर और एनकाउंटर राज’ चलाया जा रहा है। माले टीम ने पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे, सरकारी नौकरी और पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है।

MP Sudama Prasad Arrah Visit परिजनों से मिलकर जाना सच, पुलिस पर बंधक बनाने का आरोप
MP Sudama Prasad Arrah Visit सांसद सुदामा प्रसाद के साथ भाकपा-माले केंद्रीय कमेटी सदस्य व जिला सचिव अभ्युदय, प्रखंड सचिव हरेंद्र सिंह, आइसा जिला सचिव जयशंकर कुमार और आरवाईए जिला सचिव निरंजन कुमार केसरी सहित कई प्रमुख नेताओं ने मृतक के पिता और परिजनों से पूरी घटना की जानकारी ली। मृतक के पिता ने टीम को बताया कि उनका बेटा मानसिक रूप से अस्वस्थ (विक्षिप्त) था और उन्होंने सुबह ही थाने जाकर पुलिस से उसे नुकसान न पहुँचाने व अस्पताल भेजने की गुहार लगाई थी। परिजनों का गंभीर आरोप है कि पुलिस ने उन्हें और उनकी बहू को बंधक जैसी स्थिति में रखा, मिलने नहीं दिया और शुरुआत में सिर्फ पैर में छर्रा लगने की झूठी जानकारी दी।

MP Sudama Prasad Arrah Visit आत्मसमर्पण के बाद भी गोली मारने का दावा, 50 लाख मुआवजे की मांग
सांसद सुदामा प्रसाद ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए प्रशासनिक थ्योरी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने सरेंडर (आत्मसमर्पण) कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। माले नेताओं ने मांग की है कि इस कथित फर्जी एनकाउंटर को अंजाम देने वाले दोषी पुलिसकर्मियों पर सीधे हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। इसके साथ ही सरकार से पीड़ित परिवार को तत्काल 50 लाख रुपये का मुआवजा और आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई है।
MP Sudama Prasad Arrah Visit जनहित के मुद्दे उठाने की मिली सजा, न्यायिक जांच की मांग
सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि भले ही भरत तिवारी का तरीका उग्र या गलत रहा हो, लेकिन वह ज्वाइनिया गांव के कटाव पीड़ितों को बसाने और स्थानीय जनहित के बिल्कुल जायज मुद्दे उठा रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को कई बार मांग-पत्र भी सौंपा था, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण वे मानसिक तनाव में आ गए। उन्होंने कहा कि महज कुछ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर देने से मामला शांत नहीं होगा, मुख्यमंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। भाकपा-माले जिला कार्यालय सचिव दिलराज प्रीतम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पार्टी ने इस पूरे एनकाउंटर कांड की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराने तथा दोषियों को जेल भेजने की पुरजोर वकालत की है।





