Aaj ka Panchang: 23 मई 2026, शनिवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाला माना जा रहा है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर पड़ने वाला यह दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है। पंचांग के अनुसार इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कई कार्यों के लिए शुभ संकेत दे रही है। ऐसे में यदि आप किसी मांगलिक कार्य, पूजा या व्रत की योजना बना रहे हैं तो दिन का पंचांग और शुभ मुहूर्त जानना आवश्यक हो जाता है।
23 मई 2026 का धार्मिक महत्व
ज्येष्ठ मास की शुक्ल अष्टमी तिथि धार्मिक रूप से विशेष मानी जाती है। इस दिन भगवान शिव, माता दुर्गा और शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। शनिवार का संयोग होने के कारण शनि पूजा और दान-पुण्य करने से शुभ फल मिलने की मान्यता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कष्टों से राहत मिलती है।
23 मई 2026 पंचांग विवरण
तिथि: शुक्ल पक्ष अष्टमी – प्रातः 4:28 बजे तक
वार: शनिवार
नक्षत्र: मघा – रात्रि 2:11 बजे तक
योग: ध्रुव योग – सुबह 6:13 बजे तक
करण: विष्टि – शाम 4:46 बजे तक
मास (अमांत): ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत): ज्येष्ठ
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थ)
शक संवत: 1948 (प्रभाउ)
सूर्य राशि: वृषभ
चंद्र राशि: सिंह
ऋतु: ग्रीष्म
अयन: उत्तरायण
दिशाशूल: पूर्व दिशा
चंद्र निवास: पूर्व दिशा
इस दिन कौन से व्रत और पर्व हैं
23 मई 2026 को कोई बड़ा राष्ट्रीय पर्व या विशेष त्योहार नहीं पड़ रहा है, लेकिन अष्टमी तिथि का अपना धार्मिक महत्व है। इस दिन माता दुर्गा की आराधना करना शुभ माना जाता है। शनिवार होने के कारण शनिदेव की पूजा, पीपल वृक्ष की परिक्रमा और तिल-तेल का दान करने की परंपरा भी प्रचलित है।
शुभ और अशुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त: सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक
राहुकाल: सुबह 8:33 बजे से 10:14 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 5:11 बजे से 6:52 बजे तक
यमघण्ट काल: दोपहर 1:37 बजे से 3:18 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल और यमघण्ट काल में नए या शुभ कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए।
सूर्य और चंद्रमा से जुड़ी जानकारी
सूर्योदय: सुबह 5:11 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:41 बजे
चंद्रोदय: सुबह 11:40 बजे
चंद्रास्त: रात्रि 12:08 बजे
पूजा और दान करने की विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान शिव, माता दुर्गा और शनिदेव की पूजा करें। शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करना शुभ माना जाता है। काले तिल, उड़द दाल और काले वस्त्र का दान करने से शनि दोष कम होने की मान्यता है। इसके अलावा जरूरतमंदों की सहायता और दान-पुण्य करने से भी सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं।
क्यों खास माना जा रहा है यह दिन
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 23 मई 2026 को ध्रुव योग और मघा नक्षत्र का प्रभाव दिन को विशेष बना रहा है। धार्मिक कार्यों, आध्यात्मिक साधना और पूजा-पाठ के लिए यह दिन शुभ माना जा रहा है। हालांकि शाम तक विष्टि करण का प्रभाव रहने के कारण बड़े मांगलिक कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
निष्कर्ष
23 मई 2026 का दिन धार्मिक आस्था, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल अष्टमी और शनिवार का संयोग इस दिन के महत्व को और बढ़ा रहा है। पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त में पूजा और दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है।





