BY
Yoganand Shrivastava
Delhi प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई ईंधन (Fuel) बचाने की अपील का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इस मुहिम की शुरुआत खुद राजनेताओं ने मिसाल पेश करते हुए की है। इसी कड़ी में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली मेट्रो में सफर कर सचिवालय का रुख किया। मुख्यमंत्री को आम यात्रियों की तरह मेट्रो में यात्रा करते देख सह-यात्रियों में खासा उत्साह देखा गया और सोशल मीडिया पर भी सीएम के इस सफर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
Delhi दिल्ली सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों ने भी छोड़ीं गाड़ियां
Delhi प्रधानमंत्री की इस पर्यावरण और अर्थव्यवस्था हितैषी अपील को दिल्ली सरकार ने पूरी गंभीरता से लिया है। सरकार के कई मंत्रियों ने न सिर्फ अपने काफिले छोटे कर दिए हैं, बल्कि वे खुद सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
- कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा का बयान: उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “आज केवल हम ही नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और सचिवालय के कर्मचारी भी निजी गाड़ियों को छोड़कर मेट्रो से दफ्तर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री की इस बेहतरीन अपील को धरातल पर उतारने की शुरुआत दिल्ली सरकार के तंत्र से हो चुकी है।”
- कैबिनेट मंत्री आशीष सूद की पहल: उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, “आज सुबह मैं अपने घर से एक स्कूली कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मेट्रो से गया था। वहां से सचिवालय भी मेट्रो के जरिए ही पहुंचा हूं और घर वापसी भी मेट्रो से ही करूंगा। देश में ईंधन की कोई किल्लत नहीं है, लेकिन देश की आत्मनिर्भरता और मजबूती में अपना योगदान देना हम सबका कर्तव्य है। विपक्ष के तंज से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, हमारा ध्यान सिर्फ देशहित पर है।”
Delhi “जब सीएम मेट्रो से चल सकती हैं, तो हम क्यों नहीं?” — आम जनता ने सराहा
इस मुहिम को लेकर जब मेट्रो में सफर कर रहे आम नागरिकों से बात की गई, तो उन्होंने इस पहल का खुलकर स्वागत किया। यात्रियों का कहना था कि मुख्यमंत्री को अपने बीच सफर करता देख उन्हें बेहद खुशी हुई।
“अगर हमारे राज्य की मुख्यमंत्री वीआईपी कल्चर छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का रुख कर सकती हैं, तो आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। दिल्ली में मेट्रो की कनेक्टिविटी बेहतरीन है। पीएम मोदी की इस अपील को मानने में हमारा ही फायदा है; इससे हम भीषण गर्मी और सड़क के भारी ट्रैफिक से तो बचेंगे ही, साथ ही जेब पर होने वाला पेट्रोल-डीजल का खर्च भी बचेगा।”
राजनेताओं और प्रशासनिक अमले द्वारा उठाए गए इस कदम ने दिल्ली में ईंधन संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक बहस छेड़ दी है, जो आने वाले दिनों में पर्यावरण के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है।
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