Jamshedpur : जमशेदपुर के गोपाल मैदान में उतरा ‘मिनी जैसलमेर’, राजस्थानी मेले में उमड़ी भारी भीड़

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Jamshedpur

Report: Prem Shrivastva

Jamshedpur के बिष्टुपुर स्थित ऐतिहासिक गोपाल मैदान में रविवार से तीन दिवसीय ‘राजस्थानी महोत्सव सह मेला’ का शानदार आगाज़ हुआ। पूर्वी सिंहभूम जिला मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा आयोजित इस उत्सव ने पहले ही दिन शहरवासियों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया। पूरा मैदान राजस्थान की जीवंत संस्कृति, लोक कला और पारंपरिक खुशबू से सराबोर दिखा। मेले में विशेष रूप से तैयार किया गया ‘मिनी जैसलमेर’ लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा, जहां पहुंचकर लोगों को मरुभूमि की असली झलक देखने को मिली।

Jamshedpur सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का अनूठा प्रयास

महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने दीप प्रज्वलित कर और रंग-बिरंगे गुब्बारे हवा में छोड़कर किया। इस मौके पर आयोजकों ने मारवाड़ी परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला अध्यक्ष मुकेश मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि इस मेले का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि राजस्थान के शौर्य, संस्कारों और लोक परंपराओं से आज की युवा पीढ़ी को रूबरू कराना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं। मुख्य अतिथि सरयू राय ने भी जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में इस तरह के सांस्कृतिक संगम की सराहना की।

Jamshedpur राजस्थानी लोकगीतों और हैरतअंगेज करतबों से सजी शाम

उत्सव की पहली शाम पूरी तरह से राजस्थानी लोक कला के नाम रही। राजस्थान से आए सुप्रसिद्ध लोक संस्कृति संचालक संजय मुकुंदगढ़ ने अपनी गायकी से समां बांध दिया। जब मंच से ‘पधारो म्हारो देश’ और ‘धरती धोरा री’ जैसे कालजयी गीतों की धुनें गूंजीं, तो दर्शक खुद को झूमने से नहीं रोक पाए। गीतों के बीच-बीच में उनके हास्य-व्यंग्य ने लोगों को लोटपोट कर दिया। इसके अलावा, मारवाड़ से आए कलाकारों ने जब जलते हुए दीयों और भारी पहियों को अपनी जीभ पर संतुलित करने जैसे साहसिक लोकनृत्य व हैरतअंगेज करतब दिखाए, तो दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं।

Jamshedpur दाल-बाटी-चूरमा का स्वाद और हस्तशिल्प का जादू

मेले में पहुंचे लोग न सिर्फ संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं, बल्कि वहां के पारंपरिक व्यंजनों का भी लुत्फ उठा रहे हैं। प्रामाणिक राजस्थानी स्वाद का प्रतीक ‘दाल-बाटी-चूरमा’ के स्टॉलों पर लोगों की लंबी कतारें देखी गईं। इसके साथ ही, राजस्थानी हस्तशिल्प (Handicrafts), पारंपरिक रंग-बिरंगे परिधान, होम डेकोर के सामान और बच्चों के लिए लगाए गए झूलों के स्टॉलों पर भी जमकर खरीदारी और मनोरंजन हो रहा है। संस्कृति और स्वाद का यह अनूठा संगम अगले दो दिनों तक गोपाल मैदान में जारी रहेगा।

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