Report: Santosh
Dabra मध्य प्रदेश के किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाड़तोड़ मेहनत कर फसल तैयार करने वाले किसानों के लिए अब सरकारी पोर्टल और सर्वर सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं। उपार्जन प्रक्रिया में जरूरी पंजीयन और स्लॉट बुकिंग की तकनीकी खामियां किसानों के लिए सिरदर्द साबित हो रही हैं। डबरा सहित प्रदेश के कई हिस्सों में किसान अनाज बेचने के लिए दफ्तरों और केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

Dabra तकनीकी खामियों का जाल: सर्वर और ओटीपी ने बढ़ाई मुश्किलें
खेतों में पसीना बहाने वाला किसान अब वेबसाइट और ओटीपी के चक्रव्यूह में उलझ गया है। किसानों की सबसे बड़ी शिकायत है कि उपार्जन पोर्टल का सर्वर अक्सर डाउन रहता है। जब किसान स्लॉट बुक करने की कोशिश करते हैं, तो या तो स्लॉट ‘फुल’ दिखाता है या फिर मोबाइल पर ओटीपी ही नहीं आता। अगर किसी तरह ओटीपी आ भी जाए, तो प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही सिस्टम क्रैश हो जाता है, जिससे घंटों की मेहनत पर पानी फिर जाता है।

Dabra उपार्जन केंद्रों पर बढ़ता संकट: तुलाई के इंतजार में किसान
डबरा क्षेत्र के सरजीत सिंह जैसे दर्जनों किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में फसल लादकर केंद्रों पर खड़े हैं। बिना स्लॉट बुकिंग के सरकारी नियमानुसार तुलाई संभव नहीं है, जिससे केंद्रों पर अनाज से भरी ट्रॉलियों की लंबी कतारें लग गई हैं। खुले आसमान के नीचे अपनी उपज की रखवाली कर रहे किसान इस बात से चिंतित हैं कि यदि मौसम बदला या देरी हुई, तो उनकी मेहनत की कमाई खराब हो सकती है।

Dabra प्रशासन को अल्टीमेटम: अव्यवस्था से बढ़ रहा है जन-आक्रोश
किसानों की मांग है कि पंजीयन पोर्टल की तकनीकी त्रुटियों को तत्काल सुधारा जाए और स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया को सरल व पारदर्शी बनाया जाए। वर्तमान अव्यवस्था को लेकर अन्नदाताओं में भारी रोष व्याप्त है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सुध नहीं ली और समाधान नहीं निकाला, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन नींद से कब जागता है।





