संवाददाता – ललित दुबे
Omkareshwar विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर ने पावन नगरी ओंकारेश्वर पहुँचकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए। बड़वाह क्षेत्र के ओखलेश्वर धाम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के समापन के पश्चात वे इस तीर्थ स्थल पर पहुँचे। यहाँ उन्होंने विधि-विधान से पूजन कर राष्ट्र के कल्याण और सनातन धर्म की उन्नति के लिए प्रार्थना की।
Omkareshwar ओंकारेश्वर की महिमा: “नर्मदा स्वयं यहाँ परिक्रमा करती हैं”
दर्शन के उपरांत पत्रकारों से चर्चा करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने ओंकारेश्वर की भौगोलिक और आध्यात्मिक विशेषता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में कई ज्योतिर्लिंग नदियों के किनारे स्थित हैं, लेकिन ओंकारेश्वर की महिमा निराली है।
- अद्भुत स्वरूप: उन्होंने बताया कि यहाँ भगवान शिव जिस पर्वत पर विराजमान हैं, वह प्राकृतिक रूप से “ॐ” के आकार का है।
- माँ नर्मदा का सानिध्य: यह संभवतः इकलौता ऐसा स्थान है जहाँ स्वयं पुण्यसलिला माँ नर्मदा नदी भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग की परिक्रमा करती हैं। ऐसे पावन दर्शन का सौभाग्य मिलना बड़े पुण्य का फल है।
Omkareshwar देश की समृद्धि और सनातन के कल्याण की कामना
देवकीनंदन ठाकुर ने ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ ममलेश्वर मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने देश में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे, इसके लिए मंगलकामना की। अपने चिरपरिचित अंदाज में उन्होंने कहा, “सबका भला हो, लेकिन सनातनियों का कल्याण पहले हो।” उन्होंने समाज में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
Omkareshwar ओखलेश्वर धाम में संपन्न हुई श्रीमद् भागवत कथा
विदित हो कि देवकीनंदन ठाकुर बड़वाह के ओखलेश्वर धाम में 28 अप्रैल तक चलने वाली भव्य श्रीमद् भागवत कथा के लिए क्षेत्र में प्रवास पर थे। कथा के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े थे। कथा विश्राम के बाद वे सीधे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के चरणों में नतमस्तक होने पहुँचे। उनके यहाँ पहुँचने पर तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय प्रशासन ने उनका आत्मीय स्वागत किया।





