Damoh शहर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आते ही पूरा पंडाल ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गुंजायमान हो गया। कथा व्यास श्री रसराज दास जी महाराज ने भगवान के प्राकट्य और उनकी बाल लीलाओं का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि भक्त भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे।
Damoh सृष्टि वर्णन और भक्ति की महिमा पर प्रकाश
कथा के चतुर्थ दिवस पर श्री रसराज दास जी ने श्रीमद् भागवत महापुराण के माध्यम से सृष्टि की उत्पत्ति और भगवान की अनन्य भक्ति के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल श्रवण की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का पावन मार्ग है। महाराज जी ने बताया कि कैसे भगवान और भक्त का दिव्य मिलन प्रेम की पराकाष्ठा पर होता है। कथा के दौरान भागवत महात्म्य और सत्संग के लाभों पर भी विशेष चर्चा की गई।
Damoh मंत्री लखन पटेल का आगमन और ‘गौमाता’ पर चर्चा
कथा के मध्य मध्यप्रदेश शासन के राज्य मंत्री श्री लखन पटेल ने पंडाल में पहुँचकर महाराज जी का आशीर्वाद लिया। मंत्री पटेल ने श्रीफल और शॉल भेंट कर महाराज जी का आत्मीय सम्मान किया। इस अवसर पर श्री रसराज दास जी महाराज ने राज्य मंत्री के माध्यम से शासन तक अपनी बात पहुँचाते हुए गौमाता को ‘राज्य माता’ घोषित करने का आग्रह किया। महाराज जी ने गौ सेवा और संरक्षण को राष्ट्र के उत्थान के लिए अनिवार्य बताया।
Damoh आयोजक की ओर से चाक-चौबंद व्यवस्था
आयोजन के मुख्य सूत्रधार डॉ. कमलेश गौतम द्वारा कथा श्रवण के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए उत्तम व्यवस्थाएं की गई हैं। पंडाल में बैठक व्यवस्था से लेकर पेयजल और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिससे दूर-दराज से आए भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम लगातार सक्रिय है।





