Bhopal प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘महिला सशक्तिकरण’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने धरातल पर उतार दिया है। राज्य की नई एमएसएमई (MSME) विकास नीति-2025 और स्टार्ट-अप नीति-2025 ने न केवल प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदली है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। आज मध्य प्रदेश की महिला उद्यमी राज्य की विकास गाथा का मुख्य चेहरा बनकर उभर रही हैं।

Bhopal आंकड़ों में नारी शक्ति: MSME और स्टार्ट-अप्स में बड़ी हिस्सेदारी
मध्य प्रदेश सरकार की समावेशी नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में महिलाओं की उपस्थिति बेमिसाल है:

- MSME सेक्टर: प्रदेश की कुल 24 लाख 34 हजार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों में से 4.11 लाख (करीब 17%) का संचालन पूरी तरह महिलाओं के हाथ में है।
- स्टार्ट-अप्स की छलांग: राज्य के कुल 7264 मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स में से 3476 (48%) महिला उद्यमियों द्वारा चलाए जा रहे हैं। यह आंकड़ा देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में मध्य प्रदेश की सशक्त स्थिति को दर्शाता है।
Bhopal नई नीतियों में सौगातों की बौछार: 50% तक पूंजी अनुदान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में तैयार ‘एमएसएमई विकास नीति-2025’ में महिला उद्यमियों के लिए खजाना खोल दिया गया है। संयंत्र और मशीनरी में निवेश करने वाली महिलाओं के लिए सरकार ने विशेष वित्तीय प्रावधान किए हैं:

- पूंजी अनुदान: ₹10 करोड़ तक के निवेश पर महिला उद्यमियों को अधिकतम 48% तक का पूंजी अनुदान दिया जा रहा है।
- वर्गवार लाभ: सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए यह दर 40% है, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) वर्ग की महिलाओं के लिए इसे बढ़ाकर 50% तक किया गया है।
Bhopal स्टार्ट-अप्स के लिए विशेष वित्तीय सहायता और इंसेंटिव
‘स्टार्ट-अप नीति एवं कार्यान्वयन योजना-2025’ के तहत महिलाओं द्वारा स्थापित स्टार्टअप्स को अन्य की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है। महिला स्टार्ट-अप्स को 18% वित्तीय सहायता का प्रावधान है, जो प्रति ट्रॉच ₹18 लाख तक हो सकती है। कुल मिलाकर एक महिला स्टार्टअप को ₹72 लाख तक की सरकारी मदद मिल सकती है, जबकि अन्य के लिए यह सीमा ₹15 लाख (15%) तक सीमित है। सरकार के इन कदमों ने मध्य प्रदेश को देश का ‘विमेन आंत्रप्रेन्योरशिप हब’ बनाने की राह आसान कर दी है।





