Shivratri: हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। यह दिन भगवान महादेव की विशेष उपासना और व्रत के लिए शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और शिव पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।
Shivratri: तिथि और समय
- व्रत की तिथि: 17 मार्च 2026, मंगलवार
- चतुर्दशी प्रारंभ: 17 मार्च सुबह 09:23 बजे
- चतुर्दशी समाप्त: 18 मार्च सुबह 08:25 बजे
- निशिता काल (मुख्य पूजा समय): 17-18 मार्च मध्यरात्रि 12:07 से 12:55 बजे
Shivratri: पूजा विधि
- स्नान और संकल्प- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने का संकल्प लें। मुख्य पूजा निशिता काल में होती है, लेकिन व्रत सुबह से ही आरंभ किया जा सकता है।
- अभिषेक- शिवलिंग का पंचामृत—गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर—से अभिषेक करें।
- सामग्री अर्पण- भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद चंदन और भस्म अर्पित करें। माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं।
- मंत्र जाप और चालीसा- पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें।
- दीपक और आरती- घी का दीपक या कपूर जलाकर आरती करें।
- पारण- पूजा समाप्त होने के बाद शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।
Shivratri: मासिक शिवरात्रि का महत्व
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त मासिक शिवरात्रि का व्रत निष्ठा और श्रद्धा से रखते हैं, उनके जीवन से बाधाएं दूर होती हैं और उन्हें मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- कुंवारी कन्याएं इसे मनचाहा वर पाने के लिए करती हैं।
- विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख और परिवारिक खुशहाली के लिए यह व्रत करती हैं।





