New Delhi आचार संहिता का ‘हंटर’: सरकारी मशीनरी पर अब चुनाव आयोग का कब्जा; मंत्रियों के सरकारी दौरों और विज्ञापनों पर लगी रोक

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New Delhi

New Delhi भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा पांच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चुनावी बिगुल फूंकने के साथ ही आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) प्रभावी हो गई है। यह नियमावली चुनाव संपन्न होने तक लागू रहती है, जिसका मुख्य उद्देश्य सत्ताधारी दल को सरकारी संसाधनों के अनुचित लाभ से रोकना है। इस महत्वपूर्ण बदलाव के बाद सरकारों की कार्यप्रणाली पर पड़ने वाले असर को हम इन तीन मुख्य बिंदुओं में समझ सकते हैं:

New Delhi नीतिगत फैसलों और नई घोषणाओं पर पूर्ण प्रतिबंध

आचार संहिता लागू होते ही सरकारों के हाथ नई घोषणाओं के मामले में बंध जाते हैं।

  • नई योजनाएं: सरकार किसी भी ऐसी नई जनकल्याणकारी योजना या वित्तीय लाभ की घोषणा नहीं कर सकती जो मतदाताओं को प्रभावित कर सके।
  • उद्घाटन और शिलान्यास: मंत्रियों और राजनीतिक हस्तियों द्वारा किसी भी नए प्रोजेक्ट का शिलान्यास या लोकार्पण वर्जित हो जाता है।
  • सरकारी विज्ञापन: जनता के पैसे (राजस्व) से सरकार की उपलब्धियों का बखान करने वाले विज्ञापनों, होर्डिंग्स और पोस्टरों को सार्वजनिक स्थानों से तुरंत हटा दिया जाता है।

New Delhi प्रशासनिक नियंत्रण और तबादलों पर चुनाव आयोग का पहरा

New Delhi चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्यों की प्रशासनिक मशीनरी का ‘रिमोट कंट्रोल’ चुनाव आयोग के पास चला जाता है।

  • अधिकारियों की जवाबदेही: राज्य के सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सीधे चुनाव आयोग के अधीन आ जाते हैं। उनकी ड्यूटी और तैनाती आयोग की प्राथमिकताओं के आधार पर तय होती है।
  • तबादलों पर रोक: सामान्य परिस्थितियों में अधिकारियों के ट्रांसफर पर पूरी तरह रोक लग जाती है। यदि कानून-व्यवस्था की दृष्टि से कोई तबादला अनिवार्य हो, तो उसके लिए चुनाव आयोग की लिखित अनुमति लेना आवश्यक होता है।

New Delhi अनिवार्य सेवाएँ और रूटीन कार्यों की अनुमति

आचार संहिता का अर्थ प्रशासन का पूरी तरह ठप होना नहीं है; अनिवार्य और पूर्व-निर्धारित कार्य जारी रहते हैं।

  • नियमित कामकाज: सरकार अपने रोजमर्रा के वे प्रशासनिक कार्य जारी रख सकती है जो चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित नहीं करते। पहले से चल रहे विकास कार्यों पर रोक नहीं लगती।
  • आपातकालीन स्थिति: यदि राज्य में कोई प्राकृतिक आपदा (बाढ़, सूखा आदि) आती है, तो सरकार राहत कार्य और वित्तीय मदद दे सकती है, लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग से तत्काल मंजूरी लेनी होती है।
  • संसाधनों का उपयोग: चुनाव प्रचार के लिए सरकारी वाहनों, विमानों या किसी भी सरकारी मशीनरी का उपयोग मंत्रियों या उम्मीदवारों द्वारा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

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