Indore डॉ. ए. के. द्विवेदी: चिकित्सा और जनसेवा का संगम; होम्योपैथी शोध और ‘एनीमिया मुक्त भारत’ के संकल्प को समर्पित एक व्यक्तित्व

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Indore चिकित्सा जगत में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल उपचार तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज की मुख्यधारा में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनते हैं। इंदौर के सुप्रसिद्ध होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. ए. के. द्विवेदी इसी श्रेणी के एक प्रखर व्यक्तित्व हैं। एक कुशल चिकित्सक, शिक्षाविद् और शोधकर्ता के रूप में उन्होंने न केवल जटिल रोगों का समाधान खोजा है, बल्कि जनस्वास्थ्य जागरूकता को एक जन-आंदोलन का रूप दिया है।

Indore चिकित्सा शोध में अंतरराष्ट्रीय पहचान और राष्ट्रीय सम्मान

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से शुरू हुआ डॉ. द्विवेदी का सफर आज राष्ट्रीय गौरव का विषय बन चुका है। होम्योपैथी के सिद्धांतों को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने के उनके प्रयासों ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई है।

  • अप्लास्टिक एनीमिया पर शोध: उन्होंने ‘हाइपोप्लास्टिक मैरो’ (Aplastic Anemia) जैसे असाध्य समझे जाने वाले रोगों के उपचार में जो सफलता पाई है, वह चिकित्सा जगत के लिए एक नई उम्मीद है।
  • राष्ट्रपति द्वारा सम्मान: उनके समर्पण और उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए उन्हें दो बार भारत के राष्ट्रपति द्वारा सराहा जा चुका है, जो उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण की प्रामाणिकता को सिद्ध करता है।
  • CCRH में अहम भूमिका: वे आयुष मंत्रालय के अधीन ‘केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद’ (CCRH) के वैज्ञानिक सलाहकार मंडल के सदस्य के रूप में देश में होम्योपैथी के विकास की रूपरेखा तय कर रहे हैं।

Indore एनीमिया जागरूकता रथ: इंदौर का रोल मॉडल

Indore डॉ. द्विवेदी का सबसे प्रभावी योगदान एनीमिया (रक्ताल्पता) के खिलाफ उनकी जमीनी जंग है। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों में इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए वे प्रतिवर्ष एक अनूठी मुहिम चलाते हैं।

  • जागरूकता रथ अभियान: हर साल फरवरी के अंत से मार्च के पहले सप्ताह तक इंदौर में ‘एनीमिया जागरूकता रथ’ निकाला जाता है।
  • घर-घर दस्तक: इस अभियान के जरिए वॉलंटियर्स और चिकित्सा छात्र घर-घर जाकर निःशुल्क रक्त जाँच करते हैं, पोषण संबंधी सलाह देते हैं और आवश्यक होम्योपैथिक दवाएं वितरित करते हैं। यह मॉडल अब जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मिसाल बन चुका है।

Indore शिक्षा और समाज सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता

डॉ. द्विवेदी का मानना है कि ज्ञान का प्रसार ही समाज की वास्तविक सेवा है। इसी उद्देश्य के साथ वे चिकित्सा शिक्षा और संगठनात्मक सुधारों में सक्रिय रहते हैं।

  • शैक्षणिक योगदान: वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV), इंदौर की कार्य परिषद के सदस्य रह चुके हैं, जहाँ उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • प्रेरक व्यक्तित्व: डॉ. द्विवेदी केवल दवा ही नहीं देते, बल्कि अपनी लेखनी और व्याख्यानों के माध्यम से भावी चिकित्सकों को ‘सेवा परम धर्म’ का पाठ भी पढ़ाते हैं। सरलता और वैज्ञानिक सोच उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पूंजी है।

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