Report: Ratan kumar
Jamtara : झारखंड के जामताड़ा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर दागदार हुई है। सदर अस्पताल की कथित लापरवाही और संसाधनों की कमी के कारण एक तीन वर्षीय मासूम की जान चली गई। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल दी है, बल्कि स्थानीय लोगों के सब्र का बांध भी तोड़ दिया है। शुक्रवार को आक्रोशित नागरिकों और परिजनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

Jamtara इलाज के इंतजार में बीता वक्त, रास्ते में थमी सांसें
घटना के अनुसार, जामताड़ा बाजार निवासी संटू साव के तीन वर्षीय पुत्र अंशु को अचानक पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई थी। परिजन उम्मीद के साथ उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां का नजारा बेहद डरावना था।
- लापरवाही का आरोप: परिजनों का दावा है कि अस्पताल में उस समय कोई शिशु रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) मौजूद नहीं था।
- ऑक्सीजन का संकट: गंभीर स्थिति में होने के बावजूद बच्चे को ऑक्सीजन तक मुहैया नहीं कराई जा सकी। काफी देर तक अस्पताल में अफरा-तफरी मची रही और अंत में प्रबंधन ने हाथ खड़े करते हुए बच्चे को बाहर ले जाने की सलाह दे दी।
- रास्ते में मौत: परिजन आनन-फानन में मासूम को लेकर आसनसोल की ओर भागे, लेकिन सही समय पर प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण बच्चे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
Jamtara “गृह जिले में ही बेहाल है व्यवस्था”: प्रदर्शनकारियों का फूटा गुस्सा
मासूम की मौत के बाद शुक्रवार को लोगों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। समाहरणालय पहुँचकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शनकारी इंदिरा चौक पहुंचे।

- स्वास्थ्य मंत्री का पुतला दहन: प्रदर्शनकारियों ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला फूंका। लोगों का तर्क है कि जामताड़ा से ही स्वास्थ्य मंत्री होने के बावजूद सदर अस्पताल की हालत जर्जर है और यहां सिर्फ मरीजों को ‘रेफर’ करने का काम होता है।
- आंदोलन की चेतावनी: लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही विशेषज्ञों की नियुक्ति और जीवन रक्षक दवाओं/उपकरणों की व्यवस्था नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।





