Report: Vandna Rawat
Lucknow उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षामित्रों को केवल एक ‘सहयोगी’ की भूमिका से निकालकर उन्हें शिक्षा व्यवस्था का एक सशक्त और जिम्मेदार हिस्सा बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। योजनाबद्ध प्रशिक्षण, डिजिटलाइजेशन और स्पष्ट कार्य-विभाजन के माध्यम से न केवल उनकी कार्य-संस्कृति बदली है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी व्यापक सुधार आया है। सरकार के इन प्रयासों ने शिक्षामित्रों को ‘सक्षम’ बनाकर ‘नारी शक्ति’ और ‘युवा शक्ति’ के संकल्प को धरातल पर उतारा है।
Lucknow मानदेय में भारी बढ़ोतरी और आर्थिक सुरक्षा
सरकार ने सबसे पहले शिक्षामित्रों के आर्थिक संबल पर ध्यान केंद्रित किया। पूर्व में मिलने वाले महज ₹3,500 के मानदेय को बढ़ाकर पहले ₹10,000 किया गया और अब 1 अप्रैल 2026 से इसे ₹18,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। इस वृद्धि ने हजारों परिवारों को वित्तीय स्थिरता प्रदान की है और उनके वर्षों के परिश्रम को उचित सम्मान दिया है। यह कदम शिक्षामित्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हुआ है।
Lucknow डिजिटल शिक्षा और आधुनिक प्रशिक्षण पर जोर
शिक्षामित्रों को आधुनिक समय की जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए सरकार ने उनके कौशल विकास (Skill Development) पर विशेष निवेश किया है। उन्हें DIKSHA प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल माध्यमों से जोड़कर ई-कंटेंट और स्मार्ट क्लास के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया। बुनियादी साक्षरता और मूल्यांकन की नई विधियों को सीखने के बाद, शिक्षामित्र अब तकनीक का उपयोग कर बच्चों को अधिक प्रभावी ढंग से पढ़ाने में सक्षम हैं।
Lucknow स्पष्ट जवाबदेही और मिशन प्रेरणा में सक्रिय भूमिका
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार ने शिक्षामित्रों की भूमिका और जिम्मेदारियों को पूरी स्पष्टता के साथ परिभाषित किया है। ‘मिशन प्रेरणा’ और नामांकन अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। स्कूलों में नियमित उपस्थिति और प्रदर्शन की निगरानी की व्यवस्था लागू होने से कार्य-संस्कृति में सकारात्मक बदलाव आया है। आज शिक्षामित्र न केवल सहायक हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश की बेहतर होती शिक्षा व्यवस्था की एक मजबूत कड़ी बन चुके हैं।





