Report by: Pravins Manhar
Chhattisgarh Drug Issue: विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन सदन में प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार का मुद्दा छाया रहा। चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने गृह मंत्री विजय शर्मा का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि प्रदेश में नशा माफियाओं का प्रभाव बढ़ा है और स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि गृह विभाग कार्रवाई के आंकड़े जरूर गिना रहा है, लेकिन सामाजिक स्तर पर नशा खत्म करने के लिए ठोस पहल ज्यादा जरूरी है। सामाजिक न्याय विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि गांजा और नशीली सिरप लेने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, खासकर बलरामपुर और बस्तर जैसे क्षेत्रों में। उनका सवाल था कि आम जनता में जागरूकता के लिए क्या किया जा रहा है?
Chhattisgarh Drug Issue: सरकार ने गिनाए कार्रवाई के आंकड़े
चर्चा के दौरान सरकार की ओर से नशे के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े भी रखे गए—
- 2022 में 8,911 किलो नशीले पदार्थ नष्ट
- 2023 में 8,900 किलो गांजा नष्ट
- 2024 में 24 हजार किलो गांजा नष्ट
- 2025 में 64 हजार किलो सब्सटेंस नष्ट
गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति पर भी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि बिलासपुर समेत कई स्थानों पर 16 मामलों में करोड़ों की संपत्ति अटैच की गई है।

Chhattisgarh Drug Issue: एंटी नार्को टास्क फोर्स का गठन, वित्तीय कार्रवाई पर जोर
गृह मंत्री ने जानकारी दी कि एंटी नार्को टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसमें 100 पद स्वीकृत किए गए हैं। सभी जिलों में टीमें सक्रिय हैं और अब वित्तीय स्तर पर भी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार NDPS के साथ SAFEMA कोर्ट तक मामलों को ले जाया जा रहा है।
Chhattisgarh Drug Issue: कांग्रेस का पलटवार: बच्चों और युवाओं पर असर
इस बीच कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नशे का सीधा असर बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चे क्लासरूम के पीछे नशा करते पाए जा रहे हैं, जो प्रदेश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उनका आरोप था कि सरकार कार्रवाई की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नजर नहीं आ रहा है।
Chhattisgarh Drug Issue: सामाजिक चुनौती या कानून-व्यवस्था का मुद्दा?
गृह मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि नशा सिर्फ पुलिस का मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनौती है। इसके लिए नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन बैठकों और संयुक्त अभियानों के जरिए व्यापक रणनीति अपनाई जा रही है। रायपुर, सरगुजा और राजनांदगांव समेत कई जिलों में टास्क फोर्स सक्रिय बताई गई है।
साफ है कि सरकार जहां कार्रवाई के आंकड़े पेश कर रही है, वहीं विधायक जमीनी असर और जनजागरूकता की कमी पर सवाल उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रदेश में नशे पर लगाम लगाने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
read also: Korba मेडिकल कॉलेज में 13 माह की बच्ची की मौत, लापरवाही का आरोपों, परिजनों ने किया हंगामा





