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Asmat people अजब-गजब: इंसानी खोपड़ी का तकिया और मांस की दावत, रूह कंपा देगी इनकी परंपराएं

Asmat people

Asmat people न्यू गिनी के घने जंगलों और दलदली इलाकों में बसी अस्मत (Asmat) जनजाति को दुनिया की सबसे खूंखार जनजातियों में गिना जाता है। अपनी कलाकृति के लिए मशहूर यह जनजाति एक समय में अपने ‘नरभक्षण’ (Cannibalism) और ‘सिरों के शिकार’ (Headhunting) की परंपरा के लिए कुख्यात रही है। आधुनिक युग में भी इनके प्राचीन रीति-रिवाज किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी हैं।

दुश्मनों के मांस की दावत और खौफनाक उत्सव

Asmat people अस्मत योद्धाओं के लिए दुश्मन को मारना केवल युद्ध नहीं, बल्कि एक धार्मिक अनुष्ठान जैसा है। माना जाता है कि ये लोग अपने शत्रुओं को मारकर उनके मांस को तंदूर में भूनकर खाते हैं और इस दौरान बड़ा उत्सव मनाते हैं। इनके पीछे की सोच यह है कि दुश्मन के मांस और उसके सिर का सेवन करने से उसकी वीरता और शक्ति खाने वाले के शरीर में समाहित हो जाती है। वे अपने शिकार के सिर की तुलना किसी ‘पवित्र फल’ से करते हैं।

हड्डियों के गहने और खोपड़ी का तकिया

Asmat people इस जनजाति के रहन-सहन का तरीका बेहद विचित्र है। अस्मत लोग मृत शत्रुओं की हड्डियों को केवल फेंकते नहीं, बल्कि उन्हें ‘ट्रॉफी’ की तरह सजाकर रखते हैं।

  • खोपड़ी का उपयोग: वे दुश्मन की खोपड़ी का मांस साफ कर उसे तकिए के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
  • बर्तन और गहने: कई बार खोपड़ी को तोड़कर उसका उपयोग भोजन करने वाले बर्तन के रूप में किया जाता है, जबकि हड्डियों से आभूषण बनाए जाते हैं।
  • शौर्य का प्रतीक: घर में दुश्मन का निचला जबड़ा या रीढ़ की हड्डी रखना इनके समाज में साहस और वफादारी का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है।

बच्चों में शक्ति संचार का अनोखा अनुष्ठान

Asmat people अस्मत जनजाति की परंपराओं में बच्चों का भविष्य भी इन खौफनाक अनुष्ठानों से जुड़ा है। उत्सव के दौरान, मारे गए दुश्मन के सिर को छोटे बच्चों के पैरों के बीच रखा जाता है। इसके पीछे इनकी प्राचीन मान्यता है कि ऐसा करने से उस मृत योद्धा की तमाम ताकत और साहस उस बच्चे में स्थानांतरित हो जाता है। ये लोग नदियों के किनारे अपना बसेरा डालते हैं ताकि शिकार और बाहरी दुश्मनों पर कड़ी नजर रख सकें।

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