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Bhopal: स्वदेशी अपनाकर ही 2047 तक आत्मनिर्भर बन सकता है भारत: सुरेंद्र शर्मा

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Bhopal: भारत को वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना जरूरी है। देश में बने उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ने से घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मध्य प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने भोपाल में आयोजित स्वदेशी मेले में यह बात कही। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में आम लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

स्वदेशी जागरण मंच और स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन की ओर से भोपाल के शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर में स्वदेशी मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला 4 नवंबर तक चलेगा। आयोजन के छठे दिन, 29 अक्टूबर को स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के विषय पर विशेष चर्चा हुई। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े वक्ताओं ने अपने विचार रखे और देश में बने उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।

Bhopal: स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था: सुरेंद्र शर्मा

मध्य प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लोगों को स्वदेशी वस्तुओं को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि देश में निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता देने से भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मेले में पहुंचने वाले लोगों का उत्साह भी स्वदेशी के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

शर्मा ने कहा कि बारिश के कारण मेले में आने-जाने में कुछ परेशानी जरूर हुई, लेकिन इसके बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। उन्होंने मोबाइल फोन का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले भारत में इस्तेमाल होने वाले फोन बड़ी संख्या में विदेशों से आते थे, जबकि अब देश में भी मोबाइल फोन का संयोजन किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दो से तीन वर्षों में भारत में बने स्वदेशी स्मार्टफोन का इस्तेमाल और बढ़ेगा। इससे मेक इन इंडिया की भावना को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Bhopal: गांव की छाछ और लस्सी में भी दिखती है स्वदेशी की भावना

सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारतीय तिरंगे का उदाहरण देते हुए कहा कि कई देशों के झंडों पर चांद और तारे दिखाई देते हैं, लेकिन भारत का झंडा चांद तक पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, देश की उपलब्धियां आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।

उन्होंने शहर और गांव की जीवनशैली की तुलना करते हुए कहा कि शहर में प्यास लगने पर लोग अक्सर विदेशी कंपनियों के पेय पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि गांवों में छाछ और लस्सी जैसे पारंपरिक पेय आज भी प्रचलित हैं। स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक खानपान को अपनाना भी स्वदेशी की भावना का हिस्सा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी जरूरतों के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उत्पादों को प्राथमिकता दें।

Bhopal: जापान, जर्मनी और चीन का उदाहरण देकर समझाया स्वदेशी का महत्व

अखिल भारतीय सचिव, आरोग्य भारती डॉ. अशोक वार्ष्णेय ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के विकास से दुनिया के देशों के बीच दूरी कम हुई है। संचार और प्रचार के माध्यम भी पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सूचनाओं का सही रूप में लोगों तक पहुंचना जरूरी है।

डॉ. वार्ष्णेय ने जापान, जर्मनी और चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने अपने उत्पादों को प्राथमिकता देकर और घरेलू क्षमताओं का विकास करके आर्थिक मजबूती हासिल की है। उन्होंने कहा कि चीन कभी आर्थिक स्थिति के लिहाज से भारत के करीब था, लेकिन आज वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उनके मुताबिक, इन देशों के अनुभव से यह सीख मिलती है कि स्थानीय उद्योगों और उत्पादों को बढ़ावा देना आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Bhopal: देश की क्षमताओं पर भरोसा रखने की जरूरत: डॉ. अशोक वार्ष्णेय

डॉ. वार्ष्णेय ने कहा कि भारत ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार प्रयासों के जरिए उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के विकास में स्वावलंबन की भावना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि दूसरे देशों की ओर से शुल्क लगाए जाने जैसी परिस्थितियों में भी भारत को अपनी क्षमताओं पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। उनके अनुसार, पहले कई योजनाओं को शुरू करने से पहले धन की व्यवस्था को लेकर चिंता रहती थी, जबकि अब बड़ी राशि वाली योजनाओं के माध्यम से देश के निर्माण से जुड़े काम किए जा रहे हैं। उन्होंने घरेलू संसाधनों और अर्थव्यवस्था पर भरोसा बढ़ाने को जरूरी बताया।

डॉ. वार्ष्णेय ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश यात्राओं के दौरान और विदेशी मेहमानों के भारत आने पर उन्हें अलग-अलग राज्यों के प्रसिद्ध स्थानीय उत्पाद भेंट करते हैं। इससे भारतीय उत्पादों को दूसरे देशों में पहचान मिलती है और उनका प्रचार होता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल खरीदारी तक सीमित विचार नहीं है, बल्कि इसे जीवनशैली और व्यवहार में अपनाने की जरूरत है।

Bhopal: स्वदेशी जीवन जीना ही इसकी वास्तविक पहचान: तपन भौमिक

समाजसेवी तपन भौमिक ने कहा कि स्वदेशी का विचार केवल भाषणों और प्रचार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे अपने जीवन में उतारना जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का तन और मन दोनों स्वदेशी होने चाहिए। स्वदेशी जीवन जीना ही इसकी वास्तविक पहचान और कला है।

भौमिक ने बताया कि स्वदेशी जागरण मंच के माध्यम से देशभर में स्वदेशी की भावना को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना चाहिए। उनके मुताबिक, जब लोग अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी को प्राथमिकता देंगे, तभी यह विचार व्यापक स्तर पर प्रभावी हो सकेगा।

Bhopal: युवाओं को नौकरी मांगने के बजाय रोजगार देने वाला बनना चाहिए: रमन तिवारी

मेले की प्रस्तावना रखते हुए सह संयोजक रमन तिवारी ने बताया कि इस वर्ष आयोजन की थीम ‘स्वावलंबी और बढ़ता भारत’ रखी गई है। मेले के माध्यम से स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के विचार को लोगों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी की भावना को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।

रमन तिवारी ने बताया कि मेले में 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों और उनके परिश्रम को प्रदर्शित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवाओं और महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। युवाओं को केवल नौकरी पाने की कोशिश करने के बजाय रोजगार देने वाला बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इससे देश में उद्यमिता और स्वावलंबन को बढ़ावा मिल सकेगा।

विद्यार्थियों ने मलखम, योग और नृत्य की प्रस्तुतियों से मोहा मन

स्वदेशी मेले के छठे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। इसमें शारदा विहार विद्यालय के विद्यार्थियों ने मलखम, योग और सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों के प्रदर्शन ने कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

इसके साथ ही व्यास म्यूजिकल ग्रुप ने संगीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, श्रीकांत बुदौलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, रमन तिवारी और शोभराज सुखवानी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

4 नवंबर तक मेले में देख सकेंगे स्वदेशी उत्पाद

भोपाल के शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर में आयोजित यह स्वदेशी मेला 4 नवंबर तक चलेगा। मेले में 200 से अधिक स्टॉल के जरिए स्थानीय उत्पादों, महिलाओं के बनाए सामान और स्वदेशी उद्यमों को प्रदर्शित किया जा रहा है। आयोजन के माध्यम से लोगों को देश में बने उत्पादों के इस्तेमाल और स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया जा रहा है।

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