BY
Yoganand Shrivastava
Kanpur news: कानपुर के जाजमऊ थाना क्षेत्र में गंगा किनारे एक मृत डॉल्फिन मिलने से हड़कंप मच गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, डॉल्फिन की लंबाई लगभग 10 फीट और वजन करीब 350 किलो है। शव को वन विभाग ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
घटना शुक्रवार रात हुई, जब स्थानीय नाविकों ने गंगा में तैरती एक बड़ी वस्तु देखी। पास जाकर देखा तो वह डॉल्फिन निकली। नाविकों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच में शव 2-3 दिन पुराना बताया गया है।
वन विभाग के रेंजर राकेश पांडेय ने शव को सुरक्षित रखते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की। थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह मामला वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा होने के कारण इसे विभाग को सौंपा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जाजमऊ क्षेत्र में टेनरी उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित पानी सीधे गंगा में गिरता है, जिससे जलीय जीवन को खतरा है। क्रोमियम और अन्य केमिकल्स डॉल्फिन की खाद्य श्रृंखला में पहुंचकर उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट होगी।
गंगा डॉल्फिन, जिसे ‘जलपरी’ या ‘सूस’ भी कहा जाता है, नदी की स्वच्छता का संकेतक मानी जाती है। यह प्रजाति 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित है और इसकी औसत आयु लगभग 30 साल होती है। हाल के सर्वे के अनुसार, गंगा में कुल 6324 डॉल्फिन पाई गई हैं, लेकिन कानपुर जैसे प्रदूषित क्षेत्रों में इनकी संख्या कम है और मौत के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं।
वन विभाग ने डॉल्फिन की मौत की गहन जांच शुरू कर दी है और विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक अपशिष्ट और प्रदूषण पर कड़ी निगरानी और नदी की सफाई अभियान तेज करने की आवश्यकता है, ताकि यह दुर्लभ प्रजाति विलुप्ति से बच सके।





