लालमोनिरहाट एयरफील्ड पर हैंगर निर्माण शुरू, बांग्लादेश ने तोड़ा वादा
by: vijay nandan
बांग्लादेश एक बार फिर भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाने वाला कदम उठाने जा रहा है। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में ढाका सरकार अब भारत की उत्तर-पूर्वी सीमा के बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित लालमोनिरहाट एयरफील्ड को सैन्य उपयोग के लिए सक्रिय करने की योजना पर काम कर रही है। यह वही हवाई क्षेत्र है, जिसके बारे में बांग्लादेशी सेना ने इस वर्ष मई में साफ कहा था कि इसका इस्तेमाल केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए होगा, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं।

वादा तोड़ने की तैयारी में बांग्लादेशी सेना
बांग्लादेशी सेना के तत्कालीन ब्रिगेडियर जनरल नाजिम-उद-दौला ने 26 मई 2025 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि लालमोनिरहाट एयरफील्ड का सैन्य इस्तेमाल नहीं होगा। लेकिन अब जब नाजिम-उद-दौला को मेजर जनरल बनाकर 33वीं इन्फैंट्री डिवीजन का कमांडर नियुक्त किया गया है, तो हालिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि वहीं एयरबेस पर सैन्य निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
भारतीय संसद में उठी चिंता
भारत सरकार ने इस विकास पर ध्यान दिया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने अगस्त में संसद में बताया था कि भारत को लालमोनिरहाट एयरबेस से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी है और इस पर निगरानी रखी जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, यह एयरबेस भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है — यानी यह भारत के उत्तर बंगाल के रणनीतिक “चिकन नेक” कॉरिडोर के बेहद करीब है, जो देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है।
एयरबेस पर नया हैंगर और रेडार यूनिट
19 अक्टूबर को नॉर्थ ईस्ट न्यूज की रिपोर्ट में बताया गया कि लालमोनिरहाट एयरबेस पर एक विशाल हैंगर का निर्माण कार्य जारी है। बाद की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बांग्लादेशी सशस्त्र बल इस एयरबेस को वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System) का हिस्सा बनाने के लिए नई रेडार इकाई स्थापित करने की योजना बना रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि यह एयरबेस संभावित मिसाइल लॉन्च साइट के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। यह विकास भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
तुर्की और चीन से खरीदे गए ड्रोन का बेस
ढाका स्थित सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश इस एयरबेस को तुर्की और चीन से खरीदे गए सैन्य ग्रेड ड्रोन के लिए बेस के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है। इससे बांग्लादेश की वायु शक्ति और निगरानी क्षमता में बड़ा इजाफा होगा, लेकिन भारत के लिए यह कदम रणनीतिक रूप से संवेदनशील साबित हो सकता है।
भारतीय अधिकारियों का दौरा, फिर भी जारी निर्माण
16 अक्टूबर को भारतीय सैन्य खुफिया विभाग के तीन अधिकारियों की टीम ने बांग्लादेशी सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान के साथ लालमोनिरहाट और ठाकुरगांव एयरफील्ड्स का दौरा किया था। हालांकि, इस दौरे के बावजूद एयरबेस पर हैंगर का निर्माण कार्य जारी रहा। रिपोर्टों के अनुसार, हैंगर की छत और दीवारें पूरी हो चुकी हैं, और सात नए रेडार सिस्टम के उपकरण भी साइट पर पहुंचा दिए गए हैं।
इनमें एक उन्नत एंटीना सिस्टम भी शामिल है, जिसे लंबी दूरी की वायु निगरानी के लिए प्रयोग किया जाएगा।
भारत की रणनीतिक सतर्कता बढ़ी
हालांकि भारत ने अभी तक इस मुद्दे पर आधिकारिक विरोध दर्ज नहीं कराया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्वोत्तर सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लालमोनिरहाट एयरबेस सैन्य रूप से सक्रिय होता है, तो यह भारत की उत्तर-पूर्वी रक्षा नीति पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।





