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राष्ट्रपति ट्रंप का काल्पनिक टेक्नोलॉजी बैन, लेकिन असली सवाल, भारत की टेक किस्मत क्या खुद के हाथ में है ?

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President Trump's imaginary technology ban, but the real question is, is India's tech destiny in its own hands?

भारत इंपोर्टेड टेक्नोलॉजी और इंपोर्टेड सामान की मानसिकता के कारण पीछे हैं ?

by: vijay nandan

जरा सोचिए, किसी दिन आपके मोबाइल में एप व्हाट्सअप बंद हो जाए, गूगल सर्च इंजन बंद हो जाए, फेसबुक, यू-ट्यूब भी बंद हो जाए तो आप क्या करेंगे। जवाब है आप और हम कुछ नहीं कर पाएंगे, क्योंकि ये सारे प्लेटफॉम भारत से नहीं अमेरिका से संचालित होते हैं। कल्पना कीजिए कि किसी दिन अमेरिकी के सिरफिर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह फैसला कर ले कि भारत अब उसकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भारत को नहीं करने देगा यानी न गूगल चलेगा, न माइक्रोसॉफ्ट, न इंस्टाग्राम, फेसबुक या एक्स (ट्विटर)। यह स्थिति न केवल हमारे रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित करेगी, बल्कि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और संचार तंत्र को भी हिला सकती है। ट्रंप ने अपने तानाशाही फैसलों से इनदिनों दुनिया में उथल पुथल मचा रही थी। भारत 50% टैरिफ का सामना कर रहा है। ऐसे में देश के फाइन ब्रेंस के दिमाग में ये सवाल नहीं उठना चाहिए कि भारत कब तक आयातित टैक्नोलॉजी पर गुजारा करेगा। भारत के सुपर टैलेंटेड लोगों को अपने देश में ही हमारी जरूरत के मुताबिक टेक्नोलॉजी विकसित करना चाहिए।

इसी आशंका पर उद्योगपति हर्ष गोयनका ने हाल ही में सोशल मीडिया पर ये सवाल उठाया है, क्या भारत के पास ऐसा कोई “प्लान बी” है, जिससे वह अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता से मुक्त हो सके? इस सवाल का जवाब देते हुए जोहो कॉर्पोरेशन के संस्थापक और सीईओ श्रीधर वेम्बू ने कहा कि “हमें तकनीकी निर्भरता नहीं, तकनीकी लचीलापन चाहिए।”
वेम्बू ने इसके लिए एक 10-वर्षीय राष्ट्रीय मिशन का सुझाव दिया, जिसका मकसद है, भारत को बुनियादी टेक्नोलॉजी, यानी ऑपरेटिंग सिस्टम, चिप्स, और मैन्युफैक्चरिंग मशीनरी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना।

वेम्बू की 10-वर्षीय योजना, “डिजिटल आत्मनिर्भरता का रोडमैप”

स्वदेशी सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण: भारत को अपनी चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करनी होगी।
माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी चिप्स और अन्य महत्वपूर्ण घटकों की पूरी सप्लाई चेन देश में तैयार की जानी चाहिए।

स्वदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम और कोर सॉफ्टवेयर: सरकारी और कॉरपोरेट दोनों स्तरों पर विदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम पर निर्भरता खत्म करनी होगी। वेम्बू के अनुसार, “सिर्फ ऐप बनाना काफी नहीं, हमें ऑपरेटिंग सिस्टम और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मूलभूत सॉफ्टवेयर खुद विकसित करने होंगे।”

मैन्युफैक्चरिंग मशीनरी और रोबोटिक्स: उन्नत उत्पादों के निर्माण के लिए ज़रूरी मशीनें, उपकरण और रोबोटिक सिस्टम भारत में ही बनाए जाने चाहिए।
इससे मैन्युफैक्चरिंग का नियंत्रण भी भारत के हाथों में रहेगा।

क्यों ज़रूरी है तकनीकी स्वतंत्रता?

भारत का डिजिटल इकोसिस्टम आज गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी अमेरिकी कंपनियों पर टिका है।
इन सेवाओं पर अचानक रोक लगने का मतलब होगा। ईमेल और क्लाउड सर्विस रुकना, पेमेंट गेटवे ठप होना, सरकारी और निजी डेटा सिस्टम का ठहर जाना, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि “टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता” अब विलासिता नहीं, बल्कि ज़रूरत है।

सवाल यहीं से शुरू होता है…

भारत का टैलेंट दुनिया में सबसे आगे है। सत्या नडेला, सुंदर पिचाई, अरविंद कृष्णा जैसे भारतीय मूल के दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं। लेकिन सवाल उठता है कि जब भारतीय दिमाग वहां चमत्कार कर सकते हैं, तो वे भारत में रहकर गूगल या माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां क्यों नहीं बना पाते?

क्या भारत का इनोवेशन सिस्टम कमजोर है?
क्या सरकारी नीतियों में स्थिरता की कमी है?
या फिर हमने राष्ट्रवाद के डिजिटल रूप ‘टेक्नोलॉजिकल आत्मनिर्भरता’ को गंभीरता से लेना ही शुरू नहीं किया? 2014 के बाद से “डिजिटल इंडिया” की दिशा में बहुत काम हुआ। ऑनलाइन पेमेंट, ई-गवर्नेंस और स्टार्टअप क्रांति इसकी मिसाल हैं। लेकिन अब वक्त है एक कदम और आगे बढ़ने का। सोशल मीडिया, सर्च इंजन, और ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे कोर टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म भारत में बनें और भारत के दिमाग से चलें। चीन ने गूगल, फेसबुक या व्हाट्सऐप पर निर्भर नहीं रहकर अपने विकल्प बनाए। बाइडू, वीचैट, वीबो और अलीबाबा। भारत के पास भी वही क्षमता है, फर्क सिर्फ इरादे का है।

भारत के पास टैलेंट, संसाधन और विज़न तीनों हैं।

अब बस ज़रूरत है दीर्घकालिक नीति, सरकारी-निजी सहयोग और आत्मनिर्भरता की ठोस प्रतिबद्धता की।
वेम्बू का “प्लान बी” कोई डर की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारत को टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाने का रोडमैप है।
अगर यह दृष्टि साकार हुई, तो आने वाले दशक में भारत दुनिया की डिजिटल ताकतों के केंद्र में होगा —
अपने ऑपरेटिंग सिस्टम, अपनी चिप्स और अपनी सोच के साथ।

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