Reporter: Azad Saxena, Edit By: Mohit Jain
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले की सीमाओं से लगे अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में विकास की नई मिसाल देखने को मिल रही है। यहां तीन पंचायतों कोशलनार-1, कोशलनार-2 और हाँदावाड़ा के ग्रामीणों ने सरकारी मदद का इंतजार छोड़ खुद ही श्रमदान से 12 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने का बीड़ा उठाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मांग वे वर्षों से करते आ रहे हैं, पर अधिकारी और जनप्रतिनिधि केवल आश्वासन देते रहे। सड़क न होने से न तो एम्बुलेंस गांव तक पहुँच पाती है और न ही बच्चे समय पर स्कूल जा पाते हैं। यहाँ तक कि राशन लेने के लिए भी ग्रामीणों को पहाड़ी और पगडंडी वाला रास्ता पैदल तय करना पड़ता है।
अब इन ग्रामीणों ने ठान लिया है कि वे इस सड़क को अपने श्रम से सिर्फ तीन दिनों में तैयार करेंगे। अबूझमाड़ जैसे नक्सल प्रभावित और कठिन इलाक़े में यह पहल विकास की राह पर बढ़ने का जीवंत उदाहरण बन रही है यह संदेश देती हुई कि अगर सरकार देर करे, तो समाज खुद भी बदलाव की सड़क बना सकता है।






