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बुलडोज़र एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बिना नोटिस कार्रवाई की, तो अफसर के खर्च से होगा दोबारा निर्माण

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सुप्रीम कोर्ट लगातार बुलडोज़र एक्शन को लेकर सख्त नज़र आ रहा है। बुधवार को बुलडोज़र एक्शन पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, अफसर जज नहीं बन सकते, वो यह तय न करें की दोषी कौन है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने मामले में कार्यवाही की और अफसरों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। बेंच ने अधिकारियों के सामने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि, 15 दिन के नोटिस के बगैर निर्माण नहीं गिराया जाएगा। अगर निर्माण गिराया गया तो दोबारा निर्माण करवाया जाएगा जिसका खर्च अफसर को उठाना होगा।

बता दे कि, राजस्थान, मध्यप्रदेश समेत उत्तरप्रदेश में कई आरोपियों के निर्माण ध्वस्त किए गए थे, जिसके बाद से लगातार निर्माण ध्वस्तिकरण की कार्रवाई को लेकर गाइडलाइंस बनाने की मांग की जा रही थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार गाइडलाइंस जारी कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस

1.अगर बुलडोज़र कार्रवाई के आदेश दिए जाएंगे तो अपील के लिए समय देना भी ज़रूरी होगा।

2.रातोंरात घर गिराने से महिलाएं और बच्चे सड़कों पर आ जाते है, यह दृश्य अच्छा नहीं लगता, इसलिए अपील का समय देना ज़रूरी है।

3.कोर्ट की गाइडलाइन सड़कों, नदियों के पास किए गए अतिक्रमण पर मान्य नहीं होगी।

4. शो कॉज़ नोटिस जारी किया जाएगा, उसके बगैर निर्माण नहीं गिराया जाएगा।

5. रजिस्टर्ड पोस्ट के ज़रिए ही नोटिस जारी किया जाएगा, साथ ही उक्त निर्माण पर भी चिपकाना होगा।

6. नोटिस भेजे जाने के बाद 15 दिन का समय दिया जाएगा।

7. कलेक्टर और डीएम को मामले की जानकारी देना ज़रूरी होगा।

8. डीएम और कलेक्टर को कार्रवाई पर नज़र रखने के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी।

9. नोटिस में बताना ज़रूरी होगा की, निर्माण क्यों गिराया जा रहा है। इसकी सुनवाई कब होगी, किसके सामने होगी, एक डिजिटल पोर्टल होना भी ज़रूरी है, जहां पूरे मामले की जानकारी हो।

10. अधिकारी पूरे मामले पर पर्सनल हियरिंग करेंगे, जिसके बाद फायनल रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें बताया जाएगा कि, कार्रवाई ज़रूरी है या नहीं। साथ ही यह बताना होगा क्या निर्माण तोड़ने के अलावा कोई और रास्ता है या नहीं।

11. आर्डर डिजिटल पोर्टल पर दिखाया जाएगा।

12. अवैध निर्माण की जानकारी उक्त व्यक्ति को दी जाए, 15 दिन का समय दिया जाए, ताकि वो खुद निर्माण हटा सके, ध्वस्त कर सके। अगर निर्माण पर स्टे नहीं लगाया जाता है तब ही प्रशासन तोड़ने की कार्रवाई करेगा।

13. निर्माण गिराने की कार्रवाई की वीडियो ग्राफी की जाए, साथ ही क्षेत्रीय निगम कमिश्ननर को भी भेजी जाए।

14. गाइडलाइन का पालन ना करना कोर्ट की अवमानना होगी, उक्त कार्रवाई का ज़िम्मेदार अधिकारी को ही माना जाएगा, अधिकारी को दोबारा निर्माण करवाना होगा, साथ ही मुआवज़ा भी देना होगा।

15.कोर्ट के निर्देश सभी प्रमुख सचिवों को भेजे जाएंगे।

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