Report by: Vandana Rawat
World Environment Day: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के नाम एक भावनात्मक पाती लिखकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप माना गया है और वृक्षों, नदियों, पहाड़ों तथा जीव-जंतुओं की पूजा की परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रही है।
World Environment Day: प्रकृति की पूजा को बताया ईश्वर की उपासना
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सनातन संस्कृति में प्रकृति की पूजा को ईश्वर की उपासना के समान माना गया है। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। मानव जीवन और पर्यावरण का संबंध एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है।
देव ऋण से जुड़ा है पर्यावरण संरक्षण

मुख्यमंत्री ने भारतीय परंपरा में वर्णित देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण का उल्लेख करते हुए कहा कि देव ऋण का सीधा संबंध प्रकृति से है। जल, वन और भूमि का संरक्षण ही इस ऋण से उऋण होने का सबसे प्रभावी मार्ग है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
World Environment Day: वृक्ष जीवन और कल्याण के प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को जीवन, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। वट सावित्री व्रत, छठ पर्व और महाकुंभ जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हमारी परंपराओं और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रहा है।
World Environment Day: जल संरक्षण और वृक्षारोपण की जरूरत पहले से अधिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण और वृक्षारोपण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने “जल है तो हम हैं” को जीवन का मूल मंत्र बताते हुए जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल संकट से बचने के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर प्रयास करने होंगे।
World Environment Day: नदियों के पुनर्जीवन के लिए चल रही योजनाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ‘एक जनपद एक नदी योजना’ के माध्यम से जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही राज्य में रामसर स्थलों की संख्या बढ़ने को भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
युवाओं से की पर्यावरण आंदोलन का नेतृत्व करने की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं से जल संरक्षण, स्वच्छता, वृक्षारोपण और नदी संरक्षण के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकती है।
World Environment Day: जन्मदिन पर एक पौधा लगाने का दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे अपने जन्मदिन या किसी विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल भी करें। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव का आधार बनते हैं।
स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण ही विकसित प्रदेश की पहचान
अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण ही विकसित प्रदेश की पहचान है। उन्होंने सभी नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया।





