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मणिशंकर अय्यर ने पहलगाम हमले को 1947 के विभाजन से क्यों जोड़ा?

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Mani Shankar Aiyar

पहलगाम में क्या हुआ?

इस हफ्ते, जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत शहर पहलगाम में एक भीषण आतंकी हमला हुआ। आतंकवादियों ने पर्यटकों पर गोलियां चलाईं, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई – जिनमें से ज्यादातर गैर-मुस्लिम थे। इस हमले ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को फिर से बढ़ा दिया है, और भारत ने हमलावरों तथा उनके हाथों को पकड़ने की कसम खाई है।

मनी शंकर अय्यर का विवादित बयान

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनी शंकर अय्यर ने एक कार्यक्रम में पहलगाम हमले को “1947 के विभाजन के अनसुलझे सवालों” से जोड़कर बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बंटवारे की विरासत आज भी हिंसा को बढ़ावा दे रही है।

“विभाजन इसलिए हुआ क्योंकि गांधी, नेहरू और जिन्ना जैसे नेताओं के भारत की राष्ट्रीयता को लेकर अलग-अलग विचार थे। लेकिन सच यह है कि हम आज भी उसके नतीजे भुगत रहे हैं। क्या पहलगाम की त्रासदी इसी अनसुलझे सवाल की झलक नहीं है?” — मनी शंकर अय्यर

भारत की कड़ी कार्रवाई

भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को रोकना
  • पाकिस्तान में भारतीय दूतावास के कर्मचारियों की संख्या कम करना
  • पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना और उन्हें देश छोड़ने का आदेश देना।
  • जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के घरों को गिराना

वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हमले की “निष्पक्ष जांच” की मांग की है, जिसे भारत ने खारिज कर दिया है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

अय्यर के बयान पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। कुछ लोग उन पर आतंकवाद को सही ठहराने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि दूसरों का कहना है कि वे विभाजन के दीर्घकालिक नतीजों की ओर इशारा कर रहे हैं।

अब आगे क्या?

भारत आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रखे हुए है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ सैन्य कार्रवाई से कश्मीर में स्थायी शांति मुमकिन है? या फिर इसके लिए राजनीतिक और सामाजिक समाधान की जरूरत है?


मुख्य बातें

✔ पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत, ज्यादातर पर्यटक।
✔ अय्यर ने हमले को विभाजन से जोड़ा, विवाद पैदा किया।
✔ भारत ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया
✔ पाकिस्तान ने जांच की मांग की, भारत ने खारिज किया।


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