चुनाव आयोग (ECI) ने देशभर में मतदाता सूची की व्यापक स्क्रीनिंग शुरू करने की तैयारी कर ली है। इस अभियान का उद्देश्य वोटर लिस्ट से गैर-भारतीय नागरिकों को हटाना है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता सुनिश्चित की जा सके।
क्या है बिहार मॉडल?
बिहार में हाल ही में ECI द्वारा शुरू किया गया विशेष स्क्रीनिंग अभियान पूरे देश के लिए मॉडल बन चुका है। इस प्रक्रिया के तहत:
- घर-घर जाकर मतदाताओं की पहचान की जा रही है
- दस्तावेजों के ज़रिए मतदाता की नागरिकता और वैधता की पुष्टि हो रही है
- गैर-भारतीय नागरिकों को लिस्ट से बाहर किया जा रहा है
ECI ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया सभी राज्यों में लागू होगी।
अगली बारी: असम और बंगाल
बिहार के बाद अब अगला चरण असम और पश्चिम बंगाल में शुरू होगा, जहां:
- 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं
- लंबे समय से बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा चुनावी बहस में रहा है
- राजनीतिक दलों के बीच इस विषय पर पहले से ही विवाद है
इसलिए इन राज्यों में यह प्रक्रिया और भी संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
चरणबद्ध योजना: 2029 से पहले पूरी स्क्रीनिंग
चुनाव आयोग की योजना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी राज्यों की वोटर लिस्ट की जांच पूरी कर ली जाए।
आगामी चरणों में ये राज्य शामिल होंगे:
- 2027 में चुनाव वाले राज्य: उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर
- 2028-29: 17 राज्यों में चुनाव, उससे पहले पूरी स्क्रीनिंग की जाएगी
विपक्ष का विरोध और सुप्रीम कोर्ट में याचिका
इस कदम के खिलाफ विपक्ष लामबंद हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि:
- नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का नहीं, सरकार का अधिकार है
- आधार कार्ड और राशन कार्ड को पहचान के प्रमाण के रूप में मानना गलत है
- बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं, जिससे वे इस प्रक्रिया में फंस सकते हैं
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) और कई विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। इस मामले की सुनवाई 10 जुलाई को होनी है।
बिहार स्क्रीनिंग अभियान का डेटा
- 7.90 करोड़ फॉर्म प्रिंट कराए गए
- 7.7 करोड़ फॉर्म (97% से ज्यादा) वितरित हो चुके हैं
- 3.70 करोड़ फॉर्म (लगभग 47%) अब तक जमा हुए
- 18.16% फॉर्म ऑनलाइन सबमिट किए गए
- अंतिम तारीख: 25 जुलाई
चुनाव आयोग की यह पहल भारतीय लोकतंत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। मतदाता सूची की सफाई से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि फर्जी मतदान की संभावनाएं भी कम होंगी। हालांकि, इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है।





