रिपोर्टर: विशाल दुबे
उज्जैन: वैष्णव अखाड़ों की जमीन से जुड़े विवाद ने तूल पकड़ लिया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि अंकपात क्षेत्र के तीन प्रमुख वैष्णव अखाड़ों — दिगंबर अणि, निर्वाणी अणि और निर्मोही अखाड़ा — के स्थानीय महंतों ने अखाड़ों की जमीन अपने नाम करवा ली है।
महंत रविंद्र पुरी के अनुसार, इन महंतों ने अलग ‘रामादल अखाड़ा परिषद’ की स्थापना कर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि कुंभ-सिंहस्थ में केवल राष्ट्रीय पदाधिकारी ही प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं, स्थानीय महंतों का इस मामले में कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने ‘रामादल अखाड़ा परिषद’ को केवल झूठी लोकप्रियता हासिल करने का माध्यम बताया।
इससे पहले अक्टूबर में तीनों वैष्णव अखाड़ों के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने उज्जैन कलेक्टर को पत्र भेजकर जमीन पर अखाड़ों का नाम दर्ज कराने की मांग की थी। महंत रविंद्र पुरी ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपील की और कहा कि शैव, उदासीन और निर्मल अखाड़ों की तरह, वैष्णव अखाड़ों की जमीन पर भी केवल अखाड़े का ही नाम दर्ज होना चाहिए।अखाड़ा परिषद ने चेतावनी दी कि यदि मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया तो सिंहस्थ 2028 में इसे बड़ा विवाद बन सकता है।





