दो शत्रु देश, एक इंतज़ार: यूएई में छिपा हुआ भावनाओं का सबसे बड़ा खेल

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Two enemy countries, one wait

23 फरवरी 2025 को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होने वाला भारत-पाकिस्तान का चैंपियंस ट्रॉफी मुकाबला सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि भावनाओं का एक समंदर है। मैदान पर पहली गेंद फेंके जाने से बहुत पहले ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रहने वाले भारतीय और पाकिस्तानी प्रवासियों के दिलों में एक अलग उमंग जाग चुकी है। ये वो लोग हैं, जो सालों से इस पल का इंतज़ार कर रहे हैं—एक ऐसा मौका जब उनकी जड़ें, उनकी यादें, और उनकी उम्मीदें एक साथ मैदान पर उतरेंगी। यह लेख उनकी कहानियों का एक पन्ना है, जो दूर देश में रहते हुए भी अपने वतन की हर धड़कन को महसूस करते हैं।

दूर देश में वतन की याद

यूएई में भारतीय और पाकिस्तानी प्रवासियों की संख्या लाखों में है। ये लोग यहाँ नौकरी, व्यापार, और बेहतर ज़िंदगी की तलाश में आए हैं, लेकिन उनका दिल हमेशा अपने देश के साथ धड़कता है। क्रिकेट, जो दोनों देशों में एक धर्म की तरह है, उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक सेतु है—जो उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ता है। जब भारत और पाकिस्तान के बीच कोई मुकाबला होता है, तो यूएई के अपार्टमेंट्स, रेस्तराँ, और सामुदायिक केंद्र उत्साह से भर जाते हैं।

अबु धाबी में रहने वाले भारतीय प्रवासी अजय नायर, जो एक आईटी प्रोफेशनल हैं, कहते हैं, “मेरे लिए यह मैच सिर्फ क्रिकेट नहीं है। यह मेरे बचपन की यादें हैं, जब हम गाँव में रेडियो पर भारत-पाकिस्तान का मैच सुनते थे। अब मैं दुबई में अपने दोस्तों के साथ इसे बड़े स्क्रीन पर देखूँगा।” वहीं, शारजाह में रहने वाले पाकिस्तानी इंजीनियर कासिम अली का कहना है, “हमारे लिए यह एक जंग की तरह है, लेकिन प्यार और सम्मान वाली जंग। मैं सालों से इस दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ।”

एक साझा जुनून

भारत और पाकिस्तान के बीच की राइवलरी दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन यूएई में रहने वाले इन प्रवासियों के लिए यह राइवलरी एक अनोखा मेल भी है। यहाँ भारतीय और पाकिस्तानी दोस्त अक्सर साथ बैठकर मैच देखते हैं, एक-दूसरे को चिढ़ाते हैं, और हार-जीत को हँसी-मजाक में लेते हैं। दुबई में एक रेस्तराँ चलाने वाले भारतीय प्रवासी रमेश कुमार बताते हैं, “मेरे यहाँ भारतीय और पाकिस्तानी दोनों आते हैं। मैच के दिन स्क्रीन लगती है, और माहौल ऐसा होता है जैसे कोई त्योहार हो। पिछले टी20 वर्ल्ड कप में जब पाकिस्तान जीता, तो मेरे पाकिस्तानी दोस्तों ने मुझे मिठाई खिलाई थी।”

इसी तरह, कराची से आए प्रवासी सोहेल अशरफ, जो दुबई में एक ट्रेडर हैं, कहते हैं, “हम यहाँ भाईचारे में रहते हैं। हाँ, मैदान पर हमारी टीमें एक-दूसरे को हराना चाहती हैं, लेकिन यहाँ हम साथ में चाय पीते हैं और हँसते हैं। यह भावना भारत-पाकिस्तान मैच को खास बनाती है।”

सालों का इंतज़ार

भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज़ कई सालों से बंद है। दोनों टीमें अब सिर्फ आईसीसी टूर्नामेंट्स या एशिया कप जैसे मंचों पर ही भिड़ती हैं। यूएई, जो एक तटस्थ मैदान रहा है, यहाँ के प्रवासियों के लिए इस इंतज़ार को खत्म करने का मौका लाता है। चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का यह मैच उनके लिए एक सपने के सच होने जैसा है।

अजय कहते हैं, “2012-13 के बाद से भारत-पाकिस्तान की कोई सीरीज़ नहीं हुई। मैं अपने बेटे को बताना चाहता हूँ कि यह राइवलरी क्या होती है। दुबई में यह मैच देखना मेरे लिए उस खालीपन को भरने जैसा है।” कासिम भी कुछ ऐसा ही महसूस करते हैं: “मैं 1999 में शारजाह में एक मैच देख चुका हूँ। उस दिन की यादें आज भी ताज़ा हैं। अब फिर से वही जादू देखने को मिलेगा।”

तैयारी का जोश

मैच से पहले यूएई में रहने वाले प्रवासी अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। कोई अपनी टीम की जर्सी खरीद रहा है, तो कोई दोस्तों के साथ स्क्रीनिंग प्लान कर रहा है। दुबई के एक मॉल में भारतीय और पाकिस्तानी झंडों की बिक्री बढ़ गई है। रमेश बताते हैं, “मेरे रेस्तराँ में पहले ही बुकिंग्स शुरू हो चुकी हैं। लोग अपने देश का खाना ऑर्डर कर रहे हैं—बिरयानी, कबाब, और चाय की डिमांड सबसे ज़्यादा है।”

कई प्रवासी स्टेडियम में टिकट लेने की कोशिश में हैं, हालाँकि टिकटों की माँग इतनी ज़्यादा है कि कीमतें आसमान छू रही हैं। सोहेल कहते हैं, “मैंने स्टेडियम जाने की कोशिश की, लेकिन टिकट नहीं मिला। अब मैं अपने दोस्तों के साथ घर पर ही देखूँगा। लेकिन जोश वही रहेगा।”

भावनाओं का तूफान

भारत-पाकिस्तान का मुकाबला सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भावनाओं का तूफान है। यूएई में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह उनकी पहचान, उनके गर्व, और उनकी यादों का हिस्सा है। जीत की खुशी हो या हार का गम, ये पल उनके लिए अनमोल हैं। अजय कहते हैं, “अगर भारत जीता, तो मैं अपने पाकिस्तानी दोस्तों को चिढ़ाऊँगा। लेकिन अगर हारे, तो भी हम साथ में बैठकर अगले मैच की योजना बनाएँगे।”

कासिम का नज़रिया भी कुछ ऐसा ही है: “पाकिस्तान की जीत मेरे लिए सब कुछ होगी। लेकिन अगर हारे, तो भी मैं अपने भारतीय दोस्तों के साथ हँसूँगा। यह खेल हमें जोड़ता है, तोड़ता नहीं।”

यूएई में रहने वाले भारतीय और पाकिस्तानी प्रवासियों की यह डायरी उनके इंतज़ार, उनकी उम्मीदों, और उनके जुनून की कहानी है। 23 फरवरी 2025 का यह मैच उनके लिए सिर्फ 22 गज की पिच पर होने वाली टक्कर नहीं, बल्कि एक ऐसा लम्हा है, जो उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाएगा। मैदान पर भले ही दो टीमें आमने-सामने हों, लेकिन यूएई के इन घरों में, ये प्रवासी एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस पल को जियेंगे। यह उनकी कहानी है—दूर देश में बसी, लेकिन दिल से वतन के करीब।

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