UCC in Madhya Pradesh : शादी, लिव-इन और संपत्ति के कानून होंगे एक समान,बेहतर नीति निर्माण के लिए बेहतर जनभागीदारी जरूरी
UCC in Madhya Pradesh : समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर महिलाओं, विशेषकर अल्पसंख्यक महिलाओं की मांग है कि विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी धर्मों की महिलाओं को समान अधिकार मिलें। महिलाओं का मानना है कि उन्हें पैतृक संपत्ति में पुरुषों के बराबर और स्पष्ट कानूनी हिस्सा मिलना चाहिए। बहुविवाह पर रोक, उम्र की समानता और सभी के लिए तलाक की एक समान प्रक्रिया की मांग शामिल है ताकि लैंगिक भेदभाव समाप्त हो सके | तलाक के बाद महिलाओं के लिए एक सुनिश्चित और मजबूत आर्थिक सुरक्षा की मांग सबसे प्रमुख है… कई महिला संगठनों का यह भी मानना है कि सुधार केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि सभी क्षेत्रों और धर्मों के पर्सनल लॉ में बदलाव कर सशक्तिकरण या शोषण? लैंगिक संवेदनशीलता बढ़ाई जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता (UCC) पर हालिया और ऐतिहासिक मामलों में स्पष्ट रूप से कहा है कि इसे लागू करने का समय आ गया है।
UCC in Madhya Pradesh : न्यायालय का मानना है कि सभी धर्मों की महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए यूसीसी सबसे प्रभावी तरीका है, लेकिन यह कानून बनाना संसद (विधायिका) का ही अधिकार है… इसी के चलते मध्य प्रदेश सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है और सरकार ने कानून का मसौदा तैयार करने से पहले आम जनता से सुझाव मांगे हैं। सरकार की कोशिश है की अगस्त तक प्रदेश की 8 करोड़ आबादी के लिए अगस्त तक विवाह संपत्ति और तलाक के कानून एक जैसे किये जाये | यूसीसी का ड्राफ़्ट बनाने के लिए पहले ही उच्च स्तरीय मुख्य समिति व अन्य उप समितियां काम कर रही है। ऐसा हुआ तो मप्र यूसीसी लागू करने वाला 5वां राज्य होगा।
UCC in Madhya Pradesh : सीएम डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को जिलों के अफसरों के साथ वर्चुअल संवाद किया। इसमें मुख्य सचिव अनुराग जैन, वरिष्ठ अधिकारी, उच्चस्तरीय समिति के पदाधिकारी प्रत्यक्ष शामिल हुए। कलेक्टर्स ने वर्चुअली हिस्सा लिया। यूसीसी के कुछ बिंदुओं पर आदिवासियों को छूट मिल सकती है। सरकार का तर्क है प्रदेश में विभिन्न व्यक्तिगत तथा पारिवारिक विधियों के तहत विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार आदि विषयों से संबंधित अलग-अलग नियम-प्रक्रिया व कानून है। उच्च स्तरीय समिति इन सभी का अध्ययन कर रही है। इसके आधार पर ही ड्राफ़्ट का मूल स्वरूप तैयार किया जाएगा। ऐसे में ucc के लागू होने से कितने और सकारात्मक रिजल्ट दिखेंगे इसी पर करेंगे चर्चा……
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