रिपोर्ट: उमेश डहरिया
कोरबा: जैव विविधता से भरपूर कोरबा जिले से एक और दुर्लभ जीव की उपस्थिति की खबर सामने आई है। कटघोरा वनमण्डल अंतर्गत हरदी बाजार क्षेत्र के मुढाली ग्राम में एक किसान के घर से दुर्लभ एशियन पाम सिवेट (एशियाई ताड़ कस्तूरी बिलाव) और उसके पांच बच्चों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया।
यह घटना तब सामने आई जब ग्रामीण केशव जायसवाल ने देखा कि उनकी धान की कोठी में एक मादा कस्तूरी बिलाव अपने बच्चों के साथ रह रही है। गांव वालों के लिए यह दृश्य नया और चौंकाने वाला था। आश्चर्य की बात यह थी कि मादा सिवेट अपने बच्चों को छोड़कर जाने को बिल्कुल तैयार नहीं थी, जो उसकी मातृत्व भावना को दर्शाता है।
इसकी सूचना मिलते ही वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक एक योजनाबद्ध रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। टीम ने अत्यंत संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ मादा सिवेट और उसके पांच बच्चों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रूप से पकड़ा।
रेस्क्यू के बाद सभी को निकटवर्ती सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया, ताकि वे अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से जीवन यापन कर सकें। विशेषज्ञों के अनुसार, एशियन पाम सिवेट एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण प्रजाति है, जो भारत, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और दक्षिणपूर्वी एशिया में पाई जाती है। यह रात्रिचर और पेड़ों पर रहने वाला जीव है, जो पारिस्थितिक संतुलन में अहम भूमिका निभाता है।
यह घटना न सिर्फ कोरबा की जैव विविधता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मानवीय संवेदनशीलता और प्रकृति प्रेम से कैसे दुर्लभ जीवों की रक्षा संभव है।





