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SC-ST पीड़ितों के मुआवजे में 40% बढ़ोतरी की तैयारी, विशेष थाने और अदालतों के लिए राज्यों को मिलेगा अनुदान

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SC-ST: केंद्र सरकार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के उत्पीड़न के मामलों में पीड़ितों को मिलने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के तहत मुआवजे में करीब 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। सरकार की ओर से इसके पीछे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में हुई वृद्धि को प्रमुख आधार बताया जा रहा है।

इसके साथ ही एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए राज्यों को विशेष पुलिस थाने और अदालतें स्थापित करने में आर्थिक सहायता देने की योजना पर भी काम चल रहा है। हालांकि, प्रस्ताव पर अंतिम मंजूरी अभी बाकी है।

SC-ST: मुआवजे की न्यूनतम और अधिकतम राशि बढ़ सकती है

वर्तमान व्यवस्था के तहत अपराध की प्रकृति और उसकी गंभीरता के आधार पर SC और ST वर्ग के पीड़ितों को 85 हजार रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक मुआवजा दिया जाता है। प्रस्तावित बदलाव के बाद न्यूनतम मुआवजा राशि बढ़कर 1 लाख रुपये हो सकती है।

वहीं गंभीर मामलों में अधिकतम मुआवजा 12 लाख रुपये तक किए जाने का प्रस्ताव है। यानी मौजूदा सीमा की तुलना में पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जा सकती है।

SC-ST: सामाजिक न्याय मंत्रालय ने भेजा प्रस्ताव

मुआवजे में बदलाव का प्रस्ताव सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से तैयार किया गया है। मंत्रालय ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में हुई बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए मुआवजा राशि को संशोधित करने का सुझाव दिया है।

जानकारी के मुताबिक प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय की व्यय समिति के पास भेजा गया है। समिति की मंजूरी के बाद ही इस संबंध में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

SC-ST थाने बनाने के लिए राज्यों को आर्थिक मदद

केंद्र सरकार केवल मुआवजा राशि बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। SC/ST अत्याचार निवारण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यों में विशेष पुलिस थानों की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

प्रस्ताव के अनुसार विशेष SC/ST थाने स्थापित करने के लिए राज्यों को एक बार 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा सकती है। इन थानों के गठन के बाद होने वाला नियमित खर्च संबंधित राज्य सरकारों को उठाना होगा।

SC-ST: अभी केवल सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष थाने

SC/ST अत्याचार निवारण कानून में विशेष पुलिस थाने स्थापित करने का प्रावधान है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक केवल सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस दिशा में विशेष थानों की व्यवस्था की है।

केंद्र सरकार का मानना है कि कानून में प्रावधान होने के बावजूद कई राज्यों में इसके लिए जरूरी पुलिस और प्रशासनिक ढांचा पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से राज्यों को शुरुआती आर्थिक सहायता देने की योजना बनाई जा रही है।

SC-ST: देश में 181 विशेष SC-ST थाने संचालित

केंद्र सरकार की ओर से संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार देशभर में कुल 181 विशेष SC/ST थाने काम कर रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में इनकी संख्या में काफी अंतर है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में 51, बिहार में 40, कर्नाटक में 33, छत्तीसगढ़ में 27 और झारखंड में 24 विशेष SC/ST थाने संचालित हैं। वहीं केरल और पुडुचेरी में ऐसे थानों की संख्या तीन-तीन बताई गई है।

SC-ST: उत्तर प्रदेश और राजस्थान में विशेष थानों की कमी

SC और ST समुदाय से जुड़े उत्पीड़न के मामलों की संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश और राजस्थान महत्वपूर्ण राज्य हैं। इसके बावजूद इन राज्यों में ऐसे मामलों की जांच और कार्रवाई के लिए समर्पित विशेष पुलिस थानों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

संसदीय समिति ने भी राज्यों में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त संस्थागत व्यवस्था नहीं होने पर चिंता जताई है। समिति के अनुसार केंद्रीय सहायता उपलब्ध होने के बावजूद कई राज्यों में कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए जरूरी तंत्र मजबूत नहीं किया गया है।

SC-ST: करीब 10 साल बाद मुआवजा राशि में बदलाव की तैयारी

केंद्र सरकार लंबे अंतराल के बाद SC/ST उत्पीड़न मामलों में मिलने वाली मुआवजा राशि में संशोधन पर विचार कर रही है। इससे पहले वर्ष 2016 में मुआवजा राशि में बदलाव किया गया था।

अब बढ़ती महंगाई और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बदलाव को देखते हुए मुआवजे की मौजूदा राशि को संशोधित करने का प्रस्ताव सामने आया है। सरकार की मंजूरी मिलने पर पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ सकती है।

SC-ST: विशेष अदालतों के लिए भी सहायता देने की तैयारी

विशेष पुलिस थानों के अलावा SC/ST अत्याचार निवारण कानून के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था को भी मजबूत करने पर सरकार का जोर है। इसके पीछे उद्देश्य ऐसे मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

राज्यों में विशेष अदालतों और पुलिस तंत्र की उपलब्धता बढ़ने से शिकायतों की जांच और मामलों की सुनवाई के लिए अलग व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है।

SC-ST क्रीमी लेयर पर भी केंद्र का रुख

SC/ST समुदाय से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार का रुख हाल के दिनों में चर्चा में रहा है। आरक्षण में क्रीमी लेयर को लेकर भी केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष स्पष्ट किया है।

केंद्र का कहना है कि SC/ST आरक्षण का आधार केवल आर्थिक स्थिति नहीं है। संविधान में इन समुदायों के लिए आरक्षण की व्यवस्था उनकी सामाजिक, ऐतिहासिक और शैक्षणिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की गई है।

SC-ST: प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद होगा अंतिम फैसला

SC/ST पीड़ितों के मुआवजे में प्रस्तावित बढ़ोतरी और विशेष थानों के लिए आर्थिक सहायता से जुड़े प्रस्ताव अभी मंजूरी की प्रक्रिया में हैं। वित्त मंत्रालय की व्यय समिति से मंजूरी मिलने के बाद इन बदलावों को लागू करने की दिशा में आगे कदम उठाया जा सकता है।

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो उत्पीड़न के मामलों में SC/ST पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ेगी और राज्यों में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस तथा न्यायिक ढांचे को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।

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