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भारत पर 100% Tariff वाले अमेरिकी बिल के समर्थन में बोरिस जॉनसन, बोले- रूस पर पड़ेगा दबाव

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100% Tariff: ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी अमेरिकी टैरिफ लगाने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है। उन्होंने अमेरिका के उस विधेयक को सही कदम बताया है, जिसमें रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले कुछ देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है।

जॉनसन के मुताबिक इस तरह की आर्थिक पाबंदियों से रूस की आय पर असर पड़ेगा और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए यूक्रेन में युद्ध जारी रखना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने खास तौर पर भारत और चीन जैसे बड़े देशों का जिक्र करते हुए अमेरिकी कदम को प्रभावी बताया।

100% Tariff: भारत और चीन पर 100 फीसदी तक टैरिफ का प्रस्ताव

बोरिस जॉनसन ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित टैरिफ को लेकर कहा कि अमेरिका को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनका तर्क है कि रूस की ऊर्जा बिक्री से मिलने वाली आय उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक आधार देती है।

उन्होंने कहा कि भारत और चीन समेत कुछ बड़े देश रूस से ऊर्जा खरीद रहे हैं। ऐसे में इन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने से रूस पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाया जा सकता है।

100% Tariff: रूस के खिलाफ प्रतिबंध वाले बिल को सीनेट की मंजूरी

अमेरिकी सीनेट में रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पारित हो चुका है। इसे आगे कानून बनने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की मंजूरी की आवश्यकता होगी।

प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य रूस के ऊर्जा कारोबार से जुड़े देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है।

100% Tariff: किन देशों पर पड़ सकता है असर

प्रस्तावित व्यवस्था के दायरे में भारत और चीन के अलावा अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देशों का भी उल्लेख किया गया है। इन देशों के रूस से ऊर्जा कारोबार को देखते हुए अमेरिकी टैरिफ का असर पड़ने की संभावना जताई गई है।

हालांकि, बिल के कानून बनने और उसके बाद इसके वास्तविक स्वरूप को लेकर आगे की अमेरिकी विधायी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। टैरिफ किस तरह लागू होंगे और किन उत्पादों या देशों पर कितना असर पड़ेगा, यह अंतिम प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

100% Tariff: बोरिस जॉनसन ने क्यों किया समर्थन

बोरिस जॉनसन लंबे समय से रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक कदमों का समर्थन करते रहे हैं। उनका मानना है कि रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने से मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने अमेरिकी पहल को रूस के खिलाफ रणनीतिक दबाव बनाने का एक प्रभावी तरीका बताया। उनके मुताबिक अगर रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो इससे रूसी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

100% Tariff: यूक्रेन युद्ध से जुड़ा है पूरा मामला

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण पश्चिमी देश रूस पर पहले से ही कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा चुके हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देश रूस की ऊर्जा आय को कम करने के लिए लगातार नए उपायों पर विचार करते रहे हैं।

अमेरिका का प्रस्तावित टैरिफ भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों को आर्थिक रूप से महंगा विकल्प चुनने के लिए मजबूर करने की कोशिश की जा सकती है।

100% Tariff: जॉनसन पहले भी कर चुके हैं अमेरिकी टैरिफ का समर्थन

बोरिस जॉनसन इससे पहले भी अमेरिका की टैरिफ नीति के समर्थन में बयान दे चुके हैं। भारत पर अमेरिकी शुल्क को लेकर भी वह पहले अपनी राय जाहिर कर चुके हैं।

इस बार रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित 100 फीसदी तक टैरिफ को लेकर उनका समर्थन ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में रूस पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बनाने को लेकर चर्चा तेज है।

100% Tariff: बिल के आगे बढ़ने पर भारत के लिए क्या मायने

अगर यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है और भारत पर भी इसके तहत टैरिफ लागू किए जाते हैं, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है। भारत के लिए रूस से ऊर्जा आयात और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, फिलहाल यह देखना होगा कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक का क्या भविष्य रहता है और अंतिम कानून में भारत समेत अन्य देशों के लिए क्या प्रावधान रखे जाते हैं।

100% Tariff: अमेरिका के फैसले पर टिकी निगाहें

सीनेट से विधेयक पारित होने के बाद अब इसकी आगे की प्रक्रिया अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और उसके बाद राष्ट्रपति स्तर की कार्रवाई पर निर्भर करेगी। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो भारत, चीन और अन्य प्रभावित देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

इस पूरे मामले में बोरिस जॉनसन का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने खुले तौर पर अमेरिका के प्रस्तावित कदम का समर्थन करते हुए इसे रूस पर दबाव बनाने की दिशा में प्रभावी बताया है।

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