Report: Avinash shrivastva
Sasaram बिहार के सासाराम में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत ने आम जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले कई दिनों से गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें लग रही हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी बड़ी संख्या में लोगों को बिना सिलेंडर लिए ही वापस लौटना पड़ रहा है। इस स्थिति ने घरेलू रसोई का बजट और प्रबंधन दोनों बिगाड़ दिया है।
Sasaram बुजुर्गों और महिलाओं की बढ़ी मुश्किलें
गैस वितरण केंद्र पर अव्यवस्था का आलम यह है कि चिलचिलाती धूप और घंटों की प्रतीक्षा के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और महिलाओं को हो रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें बार-बार एजेंसी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। कई परिवारों में गैस खत्म होने की वजह से चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया है।

Sasaram कालाबाजारी के गंभीर आरोप
कतार में खड़े उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का दावा है कि एजेंसी द्वारा सिलेंडरों की कालाबाजारी की जा रही है। आरोप है कि जो लोग अधिक पैसे देने को तैयार हैं, उन्हें पिछले दरवाजे से आसानी से सिलेंडर उपलब्ध करा दिया जाता है, जबकि नियम और नंबर के अनुसार लाइन में लगे सामान्य उपभोक्ताओं को ‘स्टॉक खत्म’ होने का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है।
Sasaram एजेंसी की सफाई और ‘वेटिंग’ का तर्क
विवाद बढ़ता देख गैस एजेंसी के मैनेजर राजेश कुमार ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि “एजेंसी पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और कालाबाजारी के आरोप निराधार हैं।” मैनेजर के अनुसार, वर्तमान में केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है जिन्होंने 13 तारीख तक बुकिंग कराई है और जिनका DSC (Delivery Confirmation) नंबर जनरेट हो चुका है। उन्होंने सीमित सप्लाई को इस किल्लत की मुख्य वजह बताया है।
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