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Sasaram Bihar Police Prohibition Constable Exam: सिपाही भर्ती परीक्षा देने पहुंचे हजारों अभ्यर्थी, पैसों के अभाव में रेलवे स्टेशन पर गर्मी और मच्छरों के बीच गुजारी रात

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Sasaram Bihar Police Prohibition Constable Exam

Report: Avinash Shrivastva

Sasaram Bihar Police Prohibition Constable Exam बिहार के सासाराम में आज मद्य निषेध विभाग (Prohibition Department) की सिपाही भर्ती परीक्षा आयोजित की जा रही है। सरकारी नौकरी और रोजगार की आस में राज्य के कोने-कोने से हजारों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होने पहुंचे हैं। लेकिन परीक्षा से पहले इन युवाओं का एक अलग ही संघर्ष देखने को मिला। पैसों की कमी और संसाधनों के अभाव में सैकड़ों परीक्षार्थियों को सासाराम रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म और फुटपाथ पर, भीषण गर्मी और मच्छरों के बीच अपनी रात गुजारनी पड़ी। स्टेशन का यह नजारा बयां कर रहा है कि एक नौकरी के लिए युवा कितनी परेशानियां झेलने को मजबूर हैं।

Sasaram Bihar Police Prohibition Constable Exam स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था और एक दिन पहले उमड़ी भीड़

परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की भारी तादाद को देखते हुए रेलवे द्वारा अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों (Special Trains) का संचालन किया गया था।

  • समय से पहले आगमन: ट्रेनों की समय-सारणी और सुबह परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने की अनिवार्यता के चलते ज्यादातर परीक्षार्थी मंगलवार की शाम को ही सासाराम पहुंच गए थे।
  • ठहरने का संकट: अचानक हजारों की संख्या में युवाओं के शहर में दाखिल होने से होटलों और लॉज में जगह की कमी हो गई, और जो जगहें खाली थीं, उनका किराया आम छात्रों के बजट से बाहर था।

Sasaram Bihar Police Prohibition Constable Exam फुटपाथ और स्टेशन बना ‘मजबूरी का आशियाना’

रात के समय सासाराम रेलवे स्टेशन का दृश्य सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के कड़े संघर्ष की गवाही दे रहा था:

  • मच्छरों और गर्मी का प्रकोप: चिलचिलाती गर्मी और मच्छरों के भारी प्रकोप के बावजूद, छात्र स्टेशन के फर्श पर चादर बिछाकर सोते या अपनी किताबों का रिवीजन करते नजर आए।
  • आर्थिक तंगी: यह वह वर्ग है जो महंगी यात्राएं और होटलों का खर्च नहीं उठा सकता, इसलिए रेलवे स्टेशन और खुले फुटपाथ ही इनके लिए एकमात्र सुरक्षित ठिकाना बन गए।

Sasaram Bihar Police Prohibition Constable Exam “पैसे वाले होटल में, हम जैसे गरीब स्टेशन पर”

नवादा जिले से परीक्षा देने सासाराम पहुंचे अभ्यर्थी राजू कुमार ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए अपनी पीड़ा साझा की:

“जिन छात्रों के पास पर्याप्त पैसे हैं, वे तो किसी न किसी होटल या लॉज में कमरा लेकर आराम से रुक गए हैं। लेकिन हम जैसे गरीब परिवारों के छात्रों के पास इतने पैसे नहीं होते कि सफर के साथ-साथ ठहरने का खर्च भी उठा सकें। इसलिए हमारे पास रेलवे स्टेशन या फुटपाथ पर रात बिताने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।”

युवाओं का यह संघर्ष स्पष्ट रूप से दिखाता है कि बेरोजगारी के इस दौर में एक नौकरी पाने के लिए छात्र शारीरिक और मानसिक रूप से कितनी कठिन परिस्थितियों से गुजरने को तैयार हैं। अब इन युवाओं को उम्मीद है कि उनकी यह मेहनत और रतजगा परीक्षा में सफलता के रूप में रंग लाएगा।

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