Report: Ankur pandey
Rangmahal Jhulan Utsav Ayodhya सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी पर अयोध्या के ऐतिहासिक रंगमहल मंदिर में आयोजित झूलन उत्सव ने श्रद्धालुओं को भक्ति और सौंदर्य के अद्भुत संगम का दर्शन कराया। रंग-बिरंगे फूलों और मनमोहक सजावट से सजे मंदिर परिसर में भगवान श्रीसीताराम की दिव्य झांकी आकर्षण का केंद्र रही। उत्सव देर रात तक चला और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
Rangmahal Jhulan Utsav Ayodhya फूलों की सजावट के बीच सजी मनोहारी झांकी
झूलन उत्सव के दौरान बेला, गुलाब, चमेली और अन्य सुगंधित फूलों से विशेष सजावट की गई। सुसज्जित झूलों पर भगवान श्रीराम-सीता के साथ लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी और शत्रुघ्न-श्रुतिकीर्ति के स्वरूप विराजमान रहे। शाम से शुरू हुए दर्शन मध्यरात्रि तक चलते रहे, जहां श्रद्धालुओं और संत-महंतों ने भक्ति भाव से झांकियों का दर्शन किया।
रंगमहल के महंत रामशरण दास ने मंदिर की प्राचीन परंपराओं की जानकारी देते हुए बताया कि सावन माह में पूरे महीने झूलन उत्सव मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।
Rangmahal Jhulan Utsav Ayodhya सावन भर जारी रहती है झूलन उत्सव की परंपरा
मंदिर प्रशासन के अनुसार, सावन के दौरान विभिन्न तिथियों पर भगवान के अलग-अलग स्वरूपों की विशेष झांकियां सजाई जाती हैं। यह परंपरा भक्तों को भगवान के विविध भावों और लीलाओं के दर्शन कराने का अवसर देती है।
रंगमहल मंदिर का झूलन उत्सव अयोध्या की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है, जिसमें हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
Rangmahal Jhulan Utsav Ayodhya शुक्ल पक्ष की एकादशी पर होगी विशेष ‘गलबहियां झांकी’
सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगमहल में सबसे विशेष और दुर्लभ ‘गलबहियां झांकी’ सजाई जाएगी। इस झांकी में भगवान श्रीराम और माता सीता एक-दूसरे के गले में हाथ डाले झूलन का आनंद लेते हुए दिखाई देंगे। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार इस अनूठी झांकी का दर्शन वर्ष में केवल एक बार ही संभव होता है।
कार्यक्रम में अयोध्या के अनेक प्रमुख संत-महंत, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने झूलन उत्सव की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की।



