FCRA Amendment Bill 2026: भारत सरकार संसद में फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विदेशों से भारत आने वाले धन के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाना, फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाना और विदेशी वित्तीय सहायता से जुड़े नियमों को और स्पष्ट करना बताया जा रहा है। हालांकि, बिल को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर कई तरह की चर्चाएं और आशंकाएं सामने आ रही हैं।
इसी बीच अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रस्तावित कानून को लेकर सामने आ रही गलतफहमियों पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए बिल से जुड़े कुछ प्रमुख दावों को मिथक और वास्तविकता के तौर पर समझाया। उनके अनुसार प्रस्तावित बदलावों को किसी विशेष धर्म, समुदाय या संस्था को निशाना बनाने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
FCRA Amendment Bill 2026: कई देशों में विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून पहले से मौजूद
बिल को लेकर एक प्रमुख धारणा यह है कि भारत विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने के लिए अन्य देशों से अलग तरह की व्यवस्था बनाने जा रहा है। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया गया है कि कई विकसित देशों में भी विदेशी वित्तीय सहायता और विदेशी प्रभाव से संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग कानून और व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
अमेरिका में 1938 से विदेशी एजेंटों से संबंधित कानून लागू है, जबकि विदेशी खातों और वित्तीय रिपोर्टिंग से जुड़ा अलग ढांचा भी मौजूद है। ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में विदेशी प्रभाव से संबंधित कानून बनाया। कनाडा ने 2024 में इस दिशा में कानून लागू किया। ब्रिटेन में विदेशी प्रभाव से संबंधित नई व्यवस्था जुलाई 2025 से प्रभावी हुई। यूरोपीय संघ में भी इस तरह की व्यवस्था को लेकर कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है।
FCRA Amendment Bill 2026: किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाने का दावा गलत
प्रस्तावित कानून को लेकर यह आशंका भी जताई जा रही है कि इसका निशाना किसी खास धर्म या समुदाय के संगठन हो सकते हैं। सरकार की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के मुताबिक विदेशी योगदान से संबंधित नियम किसी एक धर्म, समुदाय या विचारधारा तक सीमित नहीं हैं।
बताया गया है कि नियम सभी पात्र संगठनों पर समान रूप से लागू होंगे। धार्मिक संस्थाओं की शिक्षा, पूजा स्थलों के रखरखाव और धर्म आधारित सामाजिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों के लिए विदेशी फंड प्राप्त करने की पात्रता को सामान्य तौर पर समाप्त करने की बात नहीं कही गई है। यानी धार्मिक या सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाओं के लिए नियमों का आधार उनका धर्म नहीं, बल्कि विदेशी फंडिंग से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन होगा।
FCRA Amendment Bill 2026: एनजीओ की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान नहीं
बिल को लेकर एक और बड़ा दावा यह है कि विदेशी चंदे पर निर्भर गैर सरकारी संगठनों की संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं। इसमें अस्पताल, स्कूल, धार्मिक संस्थान और सामाजिक संगठनों की संपत्तियों को लेकर भी आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं।
इस पर सरकार की ओर से बताया गया है कि विदेशी योगदान से संबंधित मौजूदा व्यवस्था में पंजीकरण रद्द होने या स्वेच्छा से पंजीकरण समाप्त करने की स्थिति में विदेशी धन और उससे तैयार संपत्तियों के संबंध में पहले से नियम मौजूद हैं। यह व्यवस्था वर्ष 2010 से लागू ढांचे का हिस्सा है।
प्रस्तावित बदलाव में ऐसी संपत्तियों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए निर्धारित प्राधिकरण तथा प्रक्रिया को स्पष्ट करने की बात कही गई है। यदि संबंधित संगठन दोबारा अपना पंजीकरण हासिल कर लेता है, तो नियमों के तहत संपत्ति और उपयोग नहीं किए गए फंड की वापसी का प्रावधान रखा गया है।
FCRA Amendment Bill 2026: धार्मिक स्थलों की संपत्ति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट
धार्मिक स्थलों को लेकर भी बिल के बारे में कई तरह की आशंकाएं सामने आई हैं। स्पष्टीकरण के अनुसार यदि किसी ऐसे संगठन ने विदेशी योगदान के माध्यम से पूजा स्थल से संबंधित संपत्ति तैयार की है, जिसका पंजीकरण रद्द हो चुका है, तो पूजा और धार्मिक गतिविधियों को जारी रखने के लिए उस संपत्ति को उसी धर्म से संबंधित किसी अन्य एफसीआरए-पंजीकृत संस्था को सौंपे जाने की व्यवस्था की जा सकती है।
इसका उद्देश्य धार्मिक गतिविधियों को रोकना नहीं, बल्कि ऐसी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया तैयार करना बताया गया है।
विदेशी फंडिंग लेने वाले एनजीओ की संख्या और राशि बढ़ी
यह दावा भी सामने आया है कि प्रस्तावित संशोधन से भारत में गैर सरकारी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के कामकाज पर व्यापक असर पड़ेगा। इसके जवाब में विदेशी योगदान से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2010-11 में एफसीआरए के तहत पंजीकृत संगठनों को करीब 1.2 अरब डॉलर का विदेशी योगदान प्राप्त हुआ था। यह राशि वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर लगभग 2.67 अरब डॉलर तक पहुंच गई। इससे यह संकेत मिलता है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने वाले संगठनों के लिए विदेशी फंडिंग का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया गया है।
भारत में करोड़ों एनजीओ, लेकिन एफसीआरए पंजीकरण सीमित
भारत में गैर सरकारी संगठनों की संख्या तीन मिलियन से अधिक बताई जाती है। इनमें से करीब 14,450 संगठनों के पास एफसीआरए के तहत पंजीकरण है। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में सामाजिक संस्थाएं सीधे विदेशी योगदान विनियमन कानून के दायरे में नहीं आतीं।
एफसीआरए मुख्य रूप से उन संस्थाओं पर लागू होता है जो विदेश से वित्तीय योगदान प्राप्त करती हैं। ऐसी संस्थाओं को निर्धारित नियमों के तहत पंजीकरण कराना, स्वीकृत माध्यम से विदेशी धन प्राप्त करना और उसके उपयोग का विवरण देना होता है।
एफसीआरए विदेशी चैरिटी और मानवीय सहायता पर रोक नहीं लगाता
एक अन्य धारणा यह है कि नया कानून विदेशी संस्थाओं से मिलने वाली चैरिटी, शोध अनुदान और मानवीय सहायता को रोक देगा। सरकार की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण में कहा गया है कि एफसीआरए का उद्देश्य विदेशी सहायता को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि उसके प्रवाह और उपयोग को नियमन के दायरे में रखना है।
स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा राहत, अनुसंधान और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले अनेक संगठन एफसीआरए के तहत विदेशी फंड प्राप्त करते हैं। नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से आने वाले धन का इस्तेमाल घोषित और वैध उद्देश्यों के लिए ही हो तथा उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाए।
विदेशी फंडिंग का नियमन राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा
सरकार के तर्क के मुताबिक विदेशी धन के प्रवाह की निगरानी केवल वित्तीय पारदर्शिता का विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से भी हो सकता है। दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में विदेशी वित्तीय सहायता और विदेशी प्रभाव से संबंधित गतिविधियों के लिए नियामकीय ढांचा मौजूद है।
भारत में विदेशी योगदान से संबंधित पहला व्यापक कानून 1976 में लाया गया था। बाद में वर्ष 2010 में इसे नए कानूनी ढांचे से बदला गया। इसके बाद 2016 और 2018 में भी नियमों में बदलाव किए गए। अब 2026 में प्रस्तावित संशोधन को उसी नियामकीय व्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया जा रहा है।
FCRA Amendment Bill 2026: सरकार का जोर पारदर्शिता और जवाबदेही पर
प्रस्तावित संशोधन के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का है। सरकार का कहना है कि विदेशी योगदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के लिए स्पष्ट नियम होने से फंड के स्रोत और उसके इस्तेमाल की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।
वहीं, इस बिल को लेकर उठ रही आपत्तियों और आशंकाओं के बीच सरकार की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि कानून का उद्देश्य वैध सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और मानवीय गतिविधियों को रोकना नहीं है। मुख्य जोर विदेशी धन के कानूनी इस्तेमाल, उचित रिपोर्टिंग और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर रहेगा।
FCRA Amendment Bill 2026: बिल को लेकर आगे संसद में होगी चर्चा
फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 को लेकर संसद में चर्चा के दौरान इसके प्रावधानों और संभावित प्रभावों पर विस्तार से बहस होने की संभावना है। विदेशी फंडिंग पर निर्भर संगठनों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े समूहों की चिंताएं भी चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं।
ऐसे में बिल के वास्तविक प्रावधान और संसद से मंजूर होने वाला अंतिम स्वरूप ही यह तय करेगा कि विदेशी योगदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के लिए नियमों में कितना बदलाव होगा। फिलहाल सरकार की ओर से सामने आए स्पष्टीकरण का मुख्य संदेश यही है कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी फंडिंग को पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।



