Jharkhand: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची में बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर मार्च करने पहुंचे। प्रदर्शनकारी JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं। आंदोलन का सबसे प्रमुख मुद्दा JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने को लेकर है।
Jharkhand: JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर छात्रों में नाराजगी
छात्रों का आरोप है कि राज्य की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। इसी मुद्दे को लेकर पिछले कई दिनों से रांची में आंदोलन चल रहा है। छात्रों की मांग है कि जिन परीक्षाओं पर सवाल उठे हैं, उन्हें रद्द कर दोबारा निष्पक्ष तरीके से आयोजित कराया जाए और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच हो।
JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर भी पहले से विवाद बना हुआ है। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठाते हुए इसके खिलाफ आंदोलन किया था। जुलाई के अंत में भी छात्रों ने रांची में मार्च निकालकर परीक्षा रद्द करने की मांग उठाई थी।
Jharkhand: CGL परीक्षा रद्द करने पर अड़े छात्र
आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र JSSC CGL परीक्षा बनी हुई है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा को लेकर उठे सवालों का समाधान तभी संभव है, जब इसे रद्द कर नए सिरे से परीक्षा आयोजित की जाए। इसके साथ ही वे पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर रहे हैं।
छात्र संगठनों का कहना है कि केवल प्रशासनिक या विभागीय स्तर की जांच से उन्हें संतुष्टि नहीं होगी। उनका तर्क है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की व्यापक जांच होनी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों का भर्ती व्यवस्था पर भरोसा दोबारा कायम हो सके।
Jharkhand: सरकार और छात्रों के बीच जांच को लेकर मतभेद
छात्रों की मांग और सरकार के प्रस्ताव के बीच सबसे बड़ा अंतर जांच की एजेंसी को लेकर है। प्रदर्शनकारी CBI जांच की मांग पर कायम हैं, जबकि सरकार ने न्यायिक जांच का विकल्प सामने रखा है।
सरकार की ओर से एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच कराने की बात कही गई है। इसके अलावा यदि जांच में वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से जांच कराने की बात भी कही गई है। हालांकि छात्र इस व्यवस्था को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं और CBI जांच पर जोर दे रहे हैं।
Jharkhand: छात्रों की तीन प्रमुख मांगें
छात्र आंदोलन की मांगों को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में देखा जा सकता है। पहली मांग विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की है। दूसरी मांग परीक्षा प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की है। तीसरी मांग भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था में स्थायी सुधार लागू करने की है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परिणाम तैयार करने और पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। उनका दावा है कि सरकार ने सुधार से जुड़ी कई मांगों पर सहमति जताई है, लेकिन परीक्षा रद्द करने और जांच को लेकर अभी भी मतभेद बना हुआ है।
Jharkhand: रांची में बड़ी संख्या में जुटे छात्र
विधानसभा मार्च के लिए झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से छात्र रांची पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शन में 15 हजार से अधिक छात्रों के शामिल होने की बात सामने आई है। आंदोलनकारियों ने मार्च के दौरान तिरंगा हाथ में रखा और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ निगरानी भी बढ़ाई गई।
Jharkhand: विधानसभा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
छात्रों के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए रांची प्रशासन ने विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। कई स्थानों पर बैरिकेड और कंटीले तार लगाए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक विधानसभा के आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया।
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू किए हैं। अधिकारियों की ओर से प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने और किसी तरह की हिंसक स्थिति से बचने की अपील की गई है।
Jharkhand: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी आंदोलन में शामिल
आंदोलन में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की भूमिका भी प्रमुख रही है। रिपोर्ट के अनुसार वह कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और विधानसभा मार्च में भी शामिल हुए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने की अपील की थी।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान किसी राजनीतिक या धार्मिक संगठन का झंडा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और प्रदर्शन को छात्रों की मांगों तक सीमित रखा जाना चाहिए।
Jharkhand: राजनीतिक स्तर पर भी बढ़ा दबाव
छात्र आंदोलन के बीच JPSC परीक्षा विवाद राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। विपक्षी नेताओं ने कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं ने भी मामले की CBI जांच की मांग की है। संसद परिसर में झारखंड से जुड़े भाजपा सांसदों ने JPSC परीक्षा में कथित पेपर लीक के मुद्दे पर प्रदर्शन किया था।
इससे भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब केवल परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती भी बनता जा रहा है।
Jharkhand: भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग ने पकड़ा जोर
छात्रों का आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा को लेकर नहीं है। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया में सुधार चाहते हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए परीक्षा रद्द होना या प्रक्रिया पर सवाल उठना समय और आर्थिक संसाधनों दोनों का नुकसान है।
ऐसे में छात्रों की मांग है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो और किसी भी शिकायत की स्थिति में समयबद्ध जांच की व्यवस्था हो।
Jharkhand: सरकार के सामने आंदोलन खत्म कराने की चुनौती
JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों और सरकार के बीच बातचीत के बावजूद प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। सरकार न्यायिक जांच और संभावित ED जांच की बात कर रही है, जबकि छात्र CBI जांच के साथ विवादित परीक्षा को रद्द करने की मांग पर कायम हैं।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों की मांगों और भर्ती प्रक्रिया में भरोसा बहाल करने के बीच संतुलन बनाने की है। वहीं छात्र संगठन भी संकेत दे चुके हैं कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जा सकता है।
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