Report: Vandna Rawat
Insurance Financial Inclusion उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि शहरी और आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग में बीमा को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक इसकी पहुंच बढ़ाने की अभी जरूरत है। उन्होंने कहा कि बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य विपरीत परिस्थिति में सबसे ज्यादा आर्थिक संकट कमजोर परिवारों के सामने आता है। ऐसे में बीमा आर्थिक सुरक्षा देने और नुकसान को कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है।
सुरेश खन्ना यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में आयोजित ‘वित्तीय समावेशन-बीमा जरूरी है’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हेल्थ इंश्योरेंस, मोटर इंश्योरेंस, क्लेम, सरकारी बीमा योजनाओं और वित्तीय समावेशन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 का आयोजन 25 से 29 सितंबर तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में किया जा रहा है।
योजनाओं की जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर जोर
Insurance Financial Inclusion वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य स्तर पर कई बीमा एवं वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं संचालित हैं। इनका जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, उतने ही अधिक लोग इनका लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने खासतौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक बीमा की जानकारी पहुंचाने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि सक्षम और शहरी वर्ग को बीमा के बारे में अपेक्षाकृत अधिक जानकारी होती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। दुर्घटना या किसी अन्य विपरीत परिस्थिति में कमजोर परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है, जिसे बीमा के माध्यम से काफी हद तक कम किया जा सकता है।
एजेंट पॉलिसी की शर्तों और क्लेम की प्रक्रिया समझाएं
Insurance Financial Inclusion सुरेश खन्ना ने बीमा एजेंटों और कंपनियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एजेंट केवल पॉलिसी कराने तक सीमित न रहें, बल्कि बीमाधारकों को प्रीमियम, नवीनीकरण, क्लेम और पॉलिसी की अन्य जरूरी शर्तों की पूरी जानकारी दें। इससे जरूरत के समय लोगों को क्लेम लेने में होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकेगा।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय स्तर पर लोगों से सीधे जुड़े व्यक्तियों तक भी बीमा संबंधी जानकारी पहुंचाने की बात कही। कार्यक्रम में हेल्थ इंश्योरेंस के क्लेम से जुड़ी भ्रांतियों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने पॉलिसी की शर्तों के अनुसार नेटवर्क या इम्पैनल्ड अस्पताल से बाहर उपचार कराने की स्थिति में आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने पर रीइम्बर्समेंट क्लेम की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
वित्त मंत्री ने वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का उदाहरण देते हुए कहा कि इसकी अहमियत अक्सर दुर्घटना के बाद समझ में आती है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में वाहन मालिकों को इसके प्रति जागरूक करने की जरूरत बताई।
गंभीर बीमारी के इलाज में आर्थिक सुरक्षा पर चर्चा
Insurance Financial Inclusion कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का भी जिक्र किया गया। सुरेश खन्ना ने कहा कि पहले परिवार में किसी व्यक्ति को लिवर सिरोसिस, किडनी की गंभीर बीमारी, कैंसर या हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारी होने पर इलाज का खर्च उठाना बड़ी चुनौती बन जाता था। कई परिवारों की जमा पूंजी खत्म हो जाती थी और जमीन-जायदाद तक बेचने या गिरवी रखने की स्थिति बन जाती थी।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बीमा और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि जरूरत के समय परिवारों को उपलब्ध वित्तीय सुरक्षा का लाभ मिल सके।
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